बंगाल-झारखंड सीमा पर नशे की खेप पकड़ने के बाद बड़ी कार्रवाई
पश्चिम बर्धमान जिले के सालानपुर इलाके में ब्राउन शुगर तस्करी के मामले में पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी है। बंगाल-झारखंड सीमा से करीब 500 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली ब्राउन शुगर बरामद किए जाने के बाद गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को गुरुवार को आसनसोल न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस ने इस मामले के पीछे सक्रिय पूरे अंतर्राज्यीय नेटवर्क का पता लगाने के लिए आरोपियों की लंबी पुलिस हिरासत की मांग की थी।
अदालत में सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नजीमुद्दीन खान और अमित पासवान के रूप में हुई है।
अब पुलिस पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि नशीले पदार्थ की यह खेप कहां से लाई गई थी, इसे झारखंड में किसे पहुंचाया जाना था और इसके पीछे मुख्य सरगना कौन है।
धांगुड़ी काशीडांगा में पुलिस की नाकाबंदी
मामले की शुरुआत सालानपुर थाना पुलिस को मिली गुप्त सूचना से हुई। सूचना के आधार पर सालानपुर थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बंगाल-झारखंड सीमा से सटे धांगुड़ी काशीडांगा इलाके में नाकाबंदी की।
पुलिस को आशंका थी कि नशीले पदार्थ की एक बड़ी खेप वाहन के जरिए बंगाल से झारखंड की ओर ले जाई जा सकती है। इसी दौरान एक संदिग्ध टाटा एसी पिकअप वैन पुलिस की नजर में आई।
पुलिस टीम ने वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली। पहली नजर में वाहन में सिगरेट के कई कार्टन रखे दिखाई दिए। लेकिन पुलिस को संदेह होने पर कार्टन और उसके आसपास के हिस्सों की गहन तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान सिगरेट के कार्टन के पीछे कथित तौर पर छिपाकर रखी गई ब्राउन शुगर बरामद हुई।
सिगरेट के कार्टन के पीछे छिपाई गई थी खेप
पुलिस के अनुसार, बरामद ब्राउन शुगर का वजन करीब 500 ग्राम है। इसे उच्च गुणवत्ता का मादक पदार्थ बताया गया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये आंकी गई है।
नशीले पदार्थ को जिस तरीके से सिगरेट के कार्टन के पीछे छिपाकर ले जाया जा रहा था, उससे पुलिस को संदेह है कि तस्करी में शामिल लोगों ने जांच एजेंसियों से बचने के लिए वाहन को सामान्य मालवाहक वाहन के रूप में दिखाने की कोशिश की थी।
पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ तस्करी में इस्तेमाल की गई पिकअप वैन को भी जब्त कर लिया है।
दोनों आरोपियों को अदालत में किया गया पेश
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए हिरासत में रखा था। गुरुवार को उन्हें आसनसोल न्यायालय में पेश किया गया।
पुलिस की ओर से अदालत में 14 दिनों की पुलिस हिरासत की मांग की गई थी। जांच अधिकारियों का कहना था कि यह मामला केवल बरामद नशीले पदार्थ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक अंतर्राज्यीय तस्करी नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
पूरे नेटवर्क की जानकारी हासिल करने और मुख्य सरगना तक पहुंचने के लिए आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जरूरी बताई गई।
हालांकि, अदालत ने दोनों आरोपियों को सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब पुलिस इसी अवधि के दौरान मामले की महत्वपूर्ण कड़ियां जोड़ने की कोशिश करेगी।
प्राथमिक पूछताछ में मालदा का सामने आया कनेक्शन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर बताया है कि ब्राउन शुगर की यह खेप मालदा से पिकअप की गई थी। इसके बाद इसे पिकअप वैन के जरिए झारखंड ले जाया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, झारखंड में मौजूद एक कथित रिसीवर के फोन के आधार पर खेप की डिलीवरी की जानी थी। हालांकि, डिलीवरी पूरी होने से पहले ही धांगुड़ी इलाके में पुलिस की कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपी पकड़े गए।
पुलिस इस दावे की भी स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है कि मालदा से खेप वास्तव में किस व्यक्ति या नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी।
रिसीवर तक पहुंचने की कोशिश
अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उस कथित रिसीवर की पहचान करना है, जिसे ब्राउन शुगर की खेप पहुंचाई जानी थी।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ के जरिए मोबाइल फोन, संपर्क सूत्र, यात्रा के मार्ग और कथित डिलीवरी व्यवस्था से जुड़े सुराग जुटाने की कोशिश करेगी। यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इससे पहले भी इसी रास्ते से नशीले पदार्थों की खेप भेजी गई थी।
फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच
पुलिस के लिए केवल गिरफ्तार आरोपियों तक पहुंचना पर्याप्त नहीं है। अब जांच का लक्ष्य इस कथित नेटवर्क की फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक तलाशना है।
यानी पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि नशीला पदार्थ आरोपियों तक कहां से पहुंचा और आगे इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तस्करी में एक से अधिक वाहन, चालक, मध्यस्थ या सप्लायर शामिल हैं।
मुख्य सरगना तक पहुंचने की चुनौती
मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में अक्सर छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा ऊपर तक बढ़ाया जाता है। सालानपुर पुलिस भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
पुलिस को उम्मीद है कि सात दिनों की हिरासत के दौरान दोनों आरोपियों से पूछताछ में इस कथित अंतर्राज्यीय सिंडिकेट से जुड़े महत्वपूर्ण नाम और संपर्क सामने आ सकते हैं।
फिलहाल पुलिस ने बरामद ब्राउन शुगर और जब्त पिकअप वैन को जांच का हिस्सा बनाया है। नशीले पदार्थ की सप्लाई श्रृंखला और आरोपियों के संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
बंगाल-झारखंड सीमा पर हुई यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि एक तरफ पुलिस ने नशीले पदार्थ की खेप को कथित डिलीवरी से पहले पकड़ लिया, वहीं अब सात दिनों की पुलिस हिरासत के दौरान जांच एजेंसियों के सामने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की चुनौती है। मालदा से लेकर झारखंड तक फैले संभावित संपर्कों और कथित मुख्य सप्लायर तक पुलिस कब पहुंचती है, यह जांच का अगला अहम पड़ाव होगा।





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