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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में वामपंथियों का उबाल: ‘जेल भरो आंदोलन’ में पुलिस से टकराव, सड़क पर बैठा जनसैलाब

Moutushi · 10 August 2026, 1:59 PM

आसनसोल: केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ सोमवार को आसनसोल में वामफ्रंट और डीवाईएफआई की ओर से एक विशाल और उग्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। गिरजा मोड़ से शुरू हुआ यह विशाल जुलूस भगत सिंह मोड़ होते हुए कोर्ट मोड़ तक पहुंचा, जहां हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए।

प्रदर्शन में हजारों की संख्या में वामपंथी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। खास बात यह रही कि कई प्रदर्शनकारियों के हाथों में भारतीय संविधान की प्रतियां नजर आईं, जिससे आंदोलन को प्रतीकात्मक और वैचारिक दोनों रूप से मजबूत संदेश मिला। कार्यकर्ता पोस्टर, बैनर और नारों के जरिए सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर आवाज उठाते दिखे।

🔥 क्या थे मुख्य मुद्दे?

प्रदर्शन के केंद्र में नए श्रम कोड का विरोध, बेरोजगारी, महंगाई और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे रहे। वामफ्रंट नेताओं का कहना है कि ये नीतियां आम जनता और मजदूर वर्ग के हितों के खिलाफ हैं।

वामफ्रंट नेता गौरांग चटर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने मांग की कि श्रम कोड को तुरंत वापस लिया जाए और जनविरोधी नीतियों को खत्म किया जाए।

⚠️ पुलिस से टकराव और बढ़ा तनाव

जुलूस जब कोर्ट मोड़ के पास पहुंचा तो पहले से तैनात पुलिस ने बैरिकेड लगाकर आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की।

हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने सख्ती दिखाई और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इसके विरोध में कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और लंबे समय तक नारेबाजी करते रहे, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

🚨 ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान

वामफ्रंट ने इस पूरे प्रदर्शन को ‘जेल भरो आंदोलन’ का नाम दिया है। नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन और तेज किया जाएगा।

📊 कितने लोग हुए शामिल?

वामफ्रंट के अनुसार, इस प्रदर्शन में करीब 5,000 से अधिक लोग शामिल हुए, जबकि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया था।

🗣️ आगे क्या?

वामपंथी नेताओं ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में राज्यभर में इस तरह के और बड़े आंदोलन किए जाएंगे। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे इस संघर्ष में साथ दें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।

👉 निष्कर्ष:
आसनसोल का यह प्रदर्शन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक माहौल का संकेत माना जा रहा है। ‘जेल भरो आंदोलन’ ने साफ कर दिया है कि वामपंथी दल अब आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतर चुके हैं।

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