‘बांग्ला पक्ष’ में बड़ी दरार! पांडवेश्वर में 50 सदस्यों का सामूहिक इस्तीफा

पांडवेश्वर, पश्चिम बर्धमान:
बांग्ला भाषा और संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से बने संगठन ‘बांग्ला पक्ष’ में अब अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर में संगठन को उस समय बड़ा झटका लगा, जब करीब 50 सदस्यों ने सामूहिक इस्तीफे का ऐलान कर दिया

📍 विधायक कार्यालय में हुआ बड़ा फैसला

जानकारी के अनुसार, शनिवार को हरिपुर स्थित विधायक कार्यालय में भाजपा विधायक जितेंद्र तिवारी की मौजूदगी में इन सदस्यों ने संगठन से अलग होने की घोषणा की। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।

⚠️ इस्तीफे की वजह क्या?

इस्तीफा देने वाले सदस्यों का कहना है कि वे ‘बांग्ला पक्ष’ से बांग्ला भाषा और संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से जुड़े थे। लेकिन समय के साथ संगठन के भीतर माहौल बदलने लगा।
उनका आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर भाजपा विरोधी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।

🗣️ “हम किसी के मोहरे नहीं”

जिला कमेटी के सदस्य भास्कर मुखर्जी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी भी राजनीतिक दल के “मोहरा” बनकर काम नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि संगठन की मूल भावना से भटकने के कारण ही यह सामूहिक फैसला लिया गया।

🏛️ भाजपा विधायक का बयान

वहीं, भाजपा विधायक जितेंद्र तिवारी ने इन सदस्यों के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में बांग्ला भाषा और संस्कृति को प्राथमिकता मिलना स्वाभाविक और जरूरी है, लेकिन इसे किसी राजनीतिक एजेंडे से जोड़ना उचित नहीं है।

🔍 आगे क्या?

इस सामूहिक इस्तीफे के बाद अब कई सवाल खड़े हो गए हैं—

  • क्या पांडवेश्वर में ‘बांग्ला पक्ष’ की पकड़ कमजोर पड़ेगी?
  • या संगठन इस झटके से उबरकर और मजबूत होकर सामने आएगा?

📊 राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटना सिर्फ एक संगठनात्मक विवाद नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी हो सकती है। आने वाले दिनों में इसका असर क्षेत्रीय राजनीति पर देखने को मिल सकता है।

👉 फिलहाल, पांडवेश्वर में ‘बांग्ला पक्ष’ की स्थिति को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, लेकिन इतना तय है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में बड़ी राजनीतिक हलचल पैदा कर सकता है।

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