छाई के प्रदूषण से फूटा गुस्सा! लोगों ने डंपर रोककर किया जोरदार प्रदर्शन

आसनसोल:
पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर आसनसोल में प्रदूषण को लेकर लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। कुल्टी थाना क्षेत्र के सांकतोड़िया स्थित हुसैनिया मोड़ इलाके में छाई (फ्लाई ऐश) के बढ़ते प्रदूषण से परेशान स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया।

📍 क्या है पूरा मामला?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से पुरुलिया के रघुनाथपुर से छाई लदे डंपर लगातार डिसेरगढ़-नियामतपुर रोड के रास्ते गुजर रहे हैं। इन डंपरों से उड़ती और गिरती छाई पूरे इलाके में फैल रही है, जिससे हवा और सड़क दोनों प्रदूषित हो रहे हैं।

लोगों का कहना है कि इससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

🚛 डंपर रोके, सड़क पर उतरे लोग

प्रदूषण से तंग आकर स्थानीय लोगों ने कई छाई लदे डंपरों को रोक दिया और सड़क पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान इलाके में कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि तुरंत प्रभाव से इस रास्ते पर छाई लदे डंपरों की आवाजाही बंद की जाए, या फिर ऐसे उपाय किए जाएं जिससे प्रदूषण न फैले।

🏛️ राजनीतिक समर्थन भी मिला

इस आंदोलन को और बल तब मिला जब भाजपा नेता अभिजीत आचार्य भी मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों के समर्थन में खड़े हुए। उन्होंने कहा कि यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

🚓 पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही सांकतोड़िया फांड़ी की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने लोगों को समझाकर रास्ता खुलवाया, लेकिन स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा।

📢 प्रशासन पर बढ़ा दबाव

भाजपा नेता अभिजीत आचार्य ने बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी प्रशासन और मंत्री अजय पोद्दार को दे दी गई है। उन्होंने जल्द कार्रवाई की मांग की है, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

🔎 क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश का अनियंत्रित परिवहन गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरा पैदा कर सकता है। यदि इसे ढककर या सुरक्षित तरीके से नहीं ले जाया जाए, तो यह हवा में मिलकर प्रदूषण बढ़ाता है।

✍️ निष्कर्ष

सांकतोड़िया का यह विरोध प्रदर्शन साफ संकेत है कि अब लोग प्रदूषण के मुद्दे पर चुप रहने वाले नहीं हैं। अगर प्रशासन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाता, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

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