बाराबनी:
बाराबनी प्रखंड कार्यालय में पंचायत समिति को लेकर चल रहा सियासी घमासान अब गहराते प्रशासनिक संकट में बदलता नजर आ रहा है। पंचायत समिति के 13 सदस्यों के इस्तीफे के बाद हालात सामान्य करने के लिए बुलाई गई बैठक भी बेनतीजा रही, क्योंकि समिति के शेष 10 सदस्य भी बैठक से नदारद रहे।
🚨 बैठक में नहीं पहुंचे सदस्य
👉 ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) ने स्थिति सुधारने के लिए बैठक बुलाई थी
👉 लेकिन एक भी सदस्य उपस्थित नहीं हुआ
👉 इससे पंचायत समिति के कामकाज पर बड़ा असर पड़ने की आशंका
⚠️ प्रशासनिक कामकाज पर संकट
इस घटनाक्रम के बाद—
👉 विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं
👉 सरकारी सेवाओं में देरी की संभावना
👉 आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है
🗣️ भाजपा का तृणमूल पर हमला
बाराबनी मंडल-2 भाजपा अध्यक्ष सोना बनर्जी ने कहा—
👉 “तृणमूल कांग्रेस के शासन में पंचायत समिति पर जबरन कब्जा किया गया था।”
👉 “लोगों को मतदान का अवसर नहीं मिला।”
उन्होंने यह भी दावा किया—
👉 सत्ता परिवर्तन के बाद 13 सदस्यों ने इस्तीफा दिया
👉 बीडीओ ने दो चरणों में बैठक बुलाई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला
🗨️ विधायक का बयान
बाराबनी के विधायक अरिजीत रॉय ने कहा—
👉 “समिति के प्रतिनिधि जनता का सामना करने की स्थिति में नहीं हैं।”
👉 “इसी कारण वे बैठक में शामिल नहीं हुए।”
उन्होंने आगे कहा—
👉 जनता के कार्य लंबे समय तक बाधित नहीं रह सकते
👉 इस मामले को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के माध्यम से उठाया जाएगा
👉 जल्द समाधान के लिए प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाएंगे
👮 प्रशासन की अगली कार्रवाई
बीडीओ कार्यालय के सूत्रों के अनुसार—
👉 बैठक में अनुपस्थिति की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी
👉 आगे की कार्रवाई जिला प्रशासन तय करेगा
🔍 क्या है आगे का रास्ता?
विशेषज्ञों का मानना है—
👉 पंचायत स्तर पर राजनीतिक सहमति जरूरी है
👉 प्रशासनिक हस्तक्षेप से गतिरोध टूट सकता है
👉 जल्द निर्णय नहीं हुआ तो विकास कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं
🔥 निष्कर्ष
बाराबनी का यह मामला—
👉 सियासी टकराव का सीधा असर प्रशासन पर दिखा रहा है
👉 आम जनता के हितों पर संकट खड़ा कर रहा है
अब सभी की नजर जिला प्रशासन पर है कि वह इस गतिरोध को कैसे खत्म करता है।


