आसनसोल: दामोदर नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव ने एक बार फिर तबाही का मंजर दिखाया है। शमडीही के पास स्थित ईश्वरदा और केसरकुरी फेरी घाट पर बने दो अस्थायी बांस के पुल तेज धारा की चपेट में आकर पूरी तरह बह गए।
👉 इस घटना के बाद दोनों इलाकों के बीच संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
🌊 नदी का रौद्र रूप, नहीं टिक सके पुल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दामोदर नदी का जलस्तर पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहा था।
👉 बुधवार को अचानक तेज बहाव के कारण अस्थायी बांस के पुल हिलने लगे और देखते ही देखते पानी में समा गए।
📸 ईश्वरदा फेरी घाट से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह उफनती धारा ने कुछ ही पलों में पुलों को बहा दिया।
🚨 आवागमन पूरी तरह बाधित
इन पुलों के बह जाने से—
- ग्रामीणों का रोजमर्रा का आवागमन ठप हो गया
- स्कूली बच्चों और कामकाजी लोगों को परेशानी बढ़ गई
- आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो सकती है
👉 अब लोगों को लंबा चक्कर लगाकर दूसरे मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।
🗣️ समिति ने दी जानकारी
दामोदर बिहारीनाथ सेतु बंधन समिति के महासचिव चंदन मिश्रा ने बताया कि—
📢 “तेज बहाव के कारण ईश्वरदा और केसरकुरी फेरी घाट के दोनों अस्थायी बांस पुल पूरी तरह बह गए हैं।”
👉 उन्होंने प्रशासन से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी की है।
⚠️ बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो सकती है
- नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है
👉 प्रशासन द्वारा अलर्ट जारी किए जाने की संभावना है।
🌟 क्यों गंभीर है यह घटना?
- ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क अचानक टूट जाना
- आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर असर
- मानसून के दौरान बढ़ता जोखिम
✅ निष्कर्ष:
दामोदर नदी का यह उफान एक बार फिर चेतावनी दे रहा है कि—
👉 प्राकृतिक आपदाओं के सामने अस्थायी व्यवस्थाएं ज्यादा देर तक टिक नहीं पातीं।
🎯 अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन कब तक वैकल्पिक पुल या सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराता है, ताकि लोगों की परेशानी कम हो सके।

