बाराबनी: पश्चिम बंगाल के बाराबनी थाना क्षेत्र के श्यामापुर इलाके में अजय नदी पर स्थित बालू घाट को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर अवैध बालू खनन का खेल जोरों पर चल रहा है, जिससे पर्यावरण, जल संसाधन और सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, निर्धारित मानचित्र और सीमाओं को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए नदी के बीचों-बीच एक साथ पांच भारी पोकलेन मशीनें उतार दी गई हैं। इन मशीनों के जरिए दिन-रात लगातार बालू निकासी का काम किया जा रहा है। ट्रकों और हाईवा गाड़ियों में धड़ल्ले से बालू भरकर बाहर भेजा जा रहा है, जिससे बालू माफियाओं को भारी मुनाफा हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अंधाधुंध खनन के कारण अजय नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है और नदी का रुख तक बदला जा रहा है। इससे आसपास के गांवों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिसके चलते पीने के पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि खनन स्थल के पास स्थित बिंदुडीह और श्यामापुर गांव के आदिवासी एवं दास समाज का पारंपरिक श्मशान घाट भी खतरे में पड़ गया है। वर्षों से यहां अंतिम संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान होते आए हैं, लेकिन अब भारी मशीनों की आवाज और लगातार खुदाई के कारण वहां ये कार्य करना मुश्किल हो गया है। इससे लोगों की आस्था और परंपरा को गहरी चोट पहुंची है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि जल्द ही अवैध खनन पर रोक नहीं लगी, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।
ग्रामीणों ने यह भी ऐलान किया है कि वे इस मामले को राज्य की मुख्यमंत्री, देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक पहुंचाएंगे। इसके लिए सामूहिक रूप से लिखित शिकायत भेजने की तैयारी की जा रही है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। लोगों की निगाहें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि आखिर कब तक बालू माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह के अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका असर न केवल पर्यावरण पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले समय में जल संकट और भी गहरा सकता है।















