कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है आगामी मानसून और उससे जुड़ी संभावित प्राकृतिक आपदाएं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है और सभी विभागों को युद्धस्तर पर तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर पालिका, नगर निगम, शिशु कल्याण एवं नारी सुरक्षा कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पाल लगातार सक्रिय हैं। वह खुद विभिन्न जिलों और खासकर शहरी इलाकों का दौरा कर रही हैं और जमीनी हकीकत का जायजा ले रही हैं। उनके निरीक्षण का मुख्य फोकस जल निकासी व्यवस्था, नालों की सफाई, पंपिंग स्टेशनों की कार्यक्षमता और बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान पर है।
विशेष रूप से कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों को लेकर सरकार ज्यादा सतर्क नजर आ रही है। हर साल बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या से जूझने वाले इलाकों में इस बार पहले से ही व्यापक तैयारी की जा रही है। कोलकाता एयरपोर्ट के आसपास स्थित टनलों, अंडरपास और जल निकासी मार्गों का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है ताकि भारी बारिश के दौरान यातायात प्रभावित न हो।

मंत्री अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट कहा है कि सरकार की प्राथमिकता है कि आम लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत, नालों की सफाई, जल निकासी पंपों की जांच और आपातकालीन राहत व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में अतिरिक्त पंपिंग मशीनें लगाने, जलभराव वाले इलाकों में कंट्रोल रूम बनाने और आपदा प्रबंधन टीमों को पहले से तैनात करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकार का लक्ष्य साफ है—इस मानसून में न तो शहर डूबेगा और न ही लोगों की जिंदगी प्रभावित होगी। इसके लिए कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं और अधिकारियों की कड़ी निगरानी में हर काम समय पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि सरकार की ये तैयारियां मानसून की चुनौतियों पर कितना असर डाल पाती हैं। फिलहाल प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।















