Sunday, 25 October 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में विद्रोही कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम की 128वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई

Moutushi · 26 May 2026, 1:28 PM

पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित पश्चिम बर्दवान जिला शासक कार्यालय में महान विद्रोही कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम की 128वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।

इस अवसर पर कवि के अद्वितीय योगदान और उनकी क्रांतिकारी सोच को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

🌟 जिले के गौरव नज़रुल इस्लाम

कार्यक्रम में पश्चिम बर्दवान के जिला शासक एस. पन्ना बलम ने कहा—

👉 काज़ी नज़रुल इस्लाम का जन्म पश्चिम बर्दवान जिले के चुरुलिया में हुआ था
👉 यह पूरे जिले के लिए गर्व की बात है
👉 उनकी विरासत को सहेजने के लिए जिले में कई संस्थानों का नाम उनके नाम पर रखा गया है

जिनमें काज़ी नज़रुल इस्लाम एयरपोर्ट और काज़ी नज़रुल यूनिवर्सिटी प्रमुख हैं।

✊ स्वतंत्रता संग्राम में नज़रुल की भूमिका

जिला शासक ने अपने संबोधन में कहा—

👉 ब्रिटिश शासन के दौरान नज़रुल की कविताएं और गीत लोगों में जोश भरते थे
👉 उनकी रचनाएं स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थीं
👉 उन्होंने समाज में अन्याय और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई

नज़रुल की लेखनी ने लाखों लोगों को संघर्ष और आज़ादी की लड़ाई के लिए प्रेरित किया।

🎤 जयंती पर भावपूर्ण आयोजन

कार्यक्रम के दौरान—

👉 नज़रुल की कविताओं और गीतों का पाठ किया गया
👉 उनके जीवन और संघर्ष पर चर्चा हुई
👉 उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

पूरा वातावरण देशभक्ति और सम्मान से भर गया।

📌 संदेश और प्रेरणा

जिला शासक एस. पन्ना बलम ने कहा—

👉 “नज़रुल इस्लाम सिर्फ एक कवि नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं”
👉 “उनकी रचनाएं आज भी हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती हैं”

📌 निष्कर्ष

काज़ी नज़रुल इस्लाम की जयंती सिर्फ एक स्मरण नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर है।

👉 विद्रोह, समानता और मानवता का संदेश
👉 नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आज भी नज़रुल की आवाज हर अन्याय के खिलाफ एक बुलंद स्वर बनकर गूंजती है।

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