कोलकाता के कालीघाट में हुई तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की बैठक ने पार्टी के भीतर उबल रहे असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है। फलता उपचुनाव से तृणमूल उम्मीदवार जाहांगीर खान के अचानक हटने के फैसले ने पार्टी के कई नेताओं को नाराज कर दिया है।
मंगलवार को हुई इस अहम बैठक में कई विधायकों ने सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व और खासकर अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठाए।
⚠️ बैठक में क्यों भड़के विधायक?
सूत्रों के अनुसार, बैठक में बेलघाटा के विधायक कुणाल घोष, उलूबेड़िया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और एंटाली के विधायक संदीपन साहा ने खुलकर नाराजगी जताई।
👉 तीनों नेता एक ही गाड़ी से बैठक में पहुंचे
👉 जाहांगीर खान के मुद्दे को लेकर तीखे सवाल उठाए
👉 पूछा गया—चुनाव से ठीक पहले मैदान छोड़ने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
इतना ही नहीं, बैठक में कथित तौर पर जाहांगीर खान को “केंद्र शासित क्षेत्र का नेता” कहकर कटाक्ष भी किया गया।
🗣️ अभिषेक बनर्जी पर उठे सवाल
बैठक में अभिषेक बनर्जी के उस बयान का भी जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि जाहांगीर खान ने उनसे इलाके में श्मशान बनाने की मांग की थी।
👉 इस बयान को लेकर भी सवाल उठाए गए
👉 विधायकों ने पारदर्शिता की मांग की
👉 पार्टी के अंदर संवाद की कमी पर चिंता जताई गई
कुणाल घोष ने कथित तौर पर कहा—
👉 “सिर्फ बंद कमरे की बैठकों से काम नहीं चलेगा, सड़क पर भी उतरना होगा।”
📉 पार्टी में बढ़ती दूरी?
सूत्रों के मुताबिक—
👉 कुल 15 विधायक बैठक में अनुपस्थित रहे
👉 7 ने स्वास्थ्य कारण बताए
👉 मालदा के हरिश्चंद्रपुर के विधायक दिल्ली में होने की बात कही
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ नेता दूसरे दलों से संपर्क में हो सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
🏛️ शोभनदेव चट्टोपाध्याय का मुद्दा भी गरमाया
बैठक में बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा न मिलने का मुद्दा भी उठा।
👉 विधानसभा सचिवालय ने समर्थन पत्र मांगा था
👉 65 विधायकों ने हस्ताक्षर किए
👉 पत्र की तारीख 6 मई बताई जा रही है
🔍 क्या है पूरा मामला?
फलता उपचुनाव में उम्मीदवार रहे जाहांगीर खान ने अचानक चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था।
👉 उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि फैसला किसके निर्देश पर लिया
👉 बाद में तृणमूल कांग्रेस ने कहा—यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है
यही मुद्दा अब पार्टी के अंदर बड़े विवाद का कारण बन गया है।
⚠️ निष्कर्ष
कालीघाट की यह बैठक तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती खींचतान और असंतोष का बड़ा संकेत मानी जा रही है।
👉 नेतृत्व पर सवाल उठना पार्टी के लिए चिंता का विषय
👉 आगामी चुनावों से पहले एकजुटता पर असर पड़ सकता है
अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस अंदरूनी संकट को कैसे संभालता है।















