Monday, 2 November 2026
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
आसनसोल लाइफलाइन अस्पताल में श्रमिकों का गुस्सा फूटा, 12 घंटे ड्यूटी के विरोध में 150 कर्मचारियों का प्रदर्शन दुर्गापुर में एसी बसों की सुरक्षा पर प्रशासन सख्त, दमकल और ट्रैफिक पुलिस ने चलाया संयुक्त अभियान साप्ताहिक राशिफल 2 से 8 नवंबर 2026: दिवाली के सप्ताह कर्क, सिंह और तुला समेत इन राशियों को मिल सकता है लाभ, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का भविष्य सिर्फ 1 रुपये में हेडफोन पाने के लिए टूट पड़े ग्राहक, नियामतपुर में मची अफरा-तफरी कुल्टी में जुटे बाउरी समाज के प्रतिनिधि, विजय सम्मेलन में संगठन की मजबूती पर हुआ मंथन छठ पूजा से पहले डीसरगढ़ दामोदर घाट पहुंचे मंत्री डॉ. अजय पोद्दार, तैयारियों का लिया जायजा आसनसोल लाइफलाइन अस्पताल में श्रमिकों का गुस्सा फूटा, 12 घंटे ड्यूटी के विरोध में 150 कर्मचारियों का प्रदर्शन दुर्गापुर में एसी बसों की सुरक्षा पर प्रशासन सख्त, दमकल और ट्रैफिक पुलिस ने चलाया संयुक्त अभियान साप्ताहिक राशिफल 2 से 8 नवंबर 2026: दिवाली के सप्ताह कर्क, सिंह और तुला समेत इन राशियों को मिल सकता है लाभ, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का भविष्य सिर्फ 1 रुपये में हेडफोन पाने के लिए टूट पड़े ग्राहक, नियामतपुर में मची अफरा-तफरी कुल्टी में जुटे बाउरी समाज के प्रतिनिधि, विजय सम्मेलन में संगठन की मजबूती पर हुआ मंथन छठ पूजा से पहले डीसरगढ़ दामोदर घाट पहुंचे मंत्री डॉ. अजय पोद्दार, तैयारियों का लिया जायजा
Viral News

बंगाल में ‘भगवा’ लहर का अगला निशाना—कोलकाता नगर निगम!

Moutushi · 8 May 2026, 10:40 AM

कोलकाता:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद अब राज्य की राजनीति का फोकस तेजी से नगर निकायों की ओर शिफ्ट होता नजर आ रहा है। खासकर कोलकाता नगर निगम, जिसे लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता रहा है, अब भाजपा के निशाने पर आ गया है।

📊 आंकड़ों ने बढ़ाई सियासी गर्मी

ताजा राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक, कोलकाता नगर निगम के कुल 144 वार्डों में से भाजपा ने 101 वार्डों में बढ़त हासिल कर सबको चौंका दिया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 43 वार्डों तक सिमटती दिखाई दे रही है।

इन आंकड़ों ने आगामी दिसंबर में होने वाले नगर निगम चुनाव को बेहद दिलचस्प और हाई-वोल्टेज बना दिया है।

⚠️ तृणमूल के गढ़ में दरार?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद बदले माहौल का असर अब शहरी राजनीति पर भी साफ दिख रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी इसको लेकर बेचैनी बढ़ रही है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अंदर ही यह चर्चा तेज है कि इस बार कोलकाता नगर निगम को बचाए रखना आसान नहीं होगा।

🏙️ किन इलाकों में कमजोर हुई पकड़?

बताया जा रहा है कि कसबा, तिलजला और राजाबाजार जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों को छोड़कर कई शहरी क्षेत्रों में तृणमूल की पकड़ कमजोर हुई है।

वहीं स्थानीय पार्षदों के खिलाफ:

  • भ्रष्टाचार
  • सिंडिकेट राज
  • अवैध वसूली

जैसे आरोपों ने जनता के बीच नाराजगी को और बढ़ा दिया है।

🏗️ अवैध निर्माण और ‘सिंडिकेट’ का असर

सूत्रों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में जलाशयों को भरकर किए गए अवैध निर्माण और स्थानीय स्तर पर फैले भ्रष्टाचार ने खासकर मध्यमवर्गीय मतदाताओं को प्रभावित किया है।

यही वजह है कि अब शहरी वोट बैंक में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता दिख रहा है।

🔄 सत्ता परिवर्तन का असर, बढ़ी अंदरूनी चिंता

विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक माहौल ने तृणमूल के स्थानीय नेताओं की चिंता बढ़ा दी है।
पार्टी के कई नेताओं के बीच अपने राजनीतिक भविष्य और अस्तित्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

🌆 सिर्फ कोलकाता नहीं, पूरे बंगाल में असर

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बदलाव की यह लहर सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रहेगी।

विधाननगर, हावड़ा, आसनसोल और सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख नगर निगमों में भी बड़े राजनीतिक उलटफेर की संभावना जताई जा रही है।

❓ सबसे बड़ा सवाल: क्या गिरेगा तृणमूल का सबसे मजबूत किला?

अब सबकी नजर दिसंबर में होने वाले नगर निगम चुनाव पर टिकी है।
क्या भाजपा इस बार कोलकाता नगर निगम पर कब्जा कर पाएगी?
या तृणमूल कांग्रेस अपने गढ़ को बचाने में सफल रहेगी?

🔥 निष्कर्ष

बंगाल की सियासत अब गांव से निकलकर शहर की गलियों तक पहुंच चुकी है…

लहर उठ चुकी है…
किले हिल रहे हैं…
और कोलकाता—अब अगली बड़ी जंग का मैदान बन चुका है!

Advertisement