Monday, 2 November 2026
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चुनाव खत्म, ‘कोयला रंगदारी’ फिर शुरू! आसनसोल कोल बेल्ट में नया सिंडिकेट सक्रिय

Moutushi · 7 May 2026, 11:52 PM

आसनसोल के कोयला क्षेत्र में एक बार फिर ‘रंगदारी’ का काला खेल सुर्खियों में है। पश्चिम बर्द्धमान के जामुड़िया, पांडवेश्वर और रानीगंज इलाके से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं, जिन्होंने स्थानीय कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों की चिंता बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि चुनाव खत्म होते ही अवैध वसूली का नेटवर्क फिर से सक्रिय हो गया है—बस चेहरे बदले हैं, तरीका वही पुराना है।

⚙️ क्या है ‘डीओ सिस्टम’ और कैसे हो रहा खेल?

आसनसोल-रानीगंज कोलफील्ड में कोयले की सप्लाई का बड़ा हिस्सा तथाकथित “डीओ सिस्टम” यानी अधिकृत डिलीवरी ऑर्डर के जरिए होता है। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि इसी सिस्टम की आड़ में अवैध वसूली का समानांतर तंत्र खड़ा कर दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, जामुड़िया और पांडवेश्वर क्षेत्रों में कुछ स्थानीय गिरोह हर ट्रक और हर टन कोयले पर “कट” ले रहे हैं। यह वसूली प्रति टन 1650 से 2500 रुपये तक बताई जा रही है। अनुमान है कि रोजाना लाखों रुपये का अवैध लेन-देन इस नेटवर्क के जरिए हो रहा है।

🚚 ट्रांसपोर्टर और कारोबारी दबाव में

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई वैध कारोबारी और ट्रांसपोर्टर भी इस दबाव में भुगतान करने को मजबूर हैं। विरोध करने पर काम रुकने या अन्य परेशानियों का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नया सिस्टम नहीं है, बल्कि पहले से चल रहे ‘सिंडिकेट मॉडल’ का ही अपडेटेड वर्जन है।

🧩 कौन हैं नए ‘खिलाड़ी’?

स्थानीय चर्चाओं में दो नाम तेजी से सामने आ रहे हैं—मैजुल और विजय। हालांकि इन नामों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि यही लोग इस नेटवर्क को चला रहे हैं और डीओ धारकों व ट्रांसपोर्टरों से वसूली कर रहे हैं।

अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े स्तर पर यह खेल आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक छत्रछाया है?

🗳️ चुनाव से पहले भी था बड़ा मुद्दा

2026 के विधानसभा चुनाव से पहले भी ‘कोयला सिंडिकेट’ का मुद्दा खूब गरमाया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि यह नेटवर्क सत्ता से जुड़ा हुआ है। वहीं सत्ताधारी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है।

चुनावी मंचों पर “कोल माफिया” एक बड़ा मुद्दा बन चुका था, लेकिन अब चुनाव खत्म होने के बाद यह मामला फिर से जमीन पर दिखाई देने लगा है।

🔥 “सत्ता बदली, सिस्टम नहीं?”

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सत्ता परिवर्तन के बाद भी यह अवैध वसूली का खेल उसी तरह जारी रहेगा? या फिर यह सिर्फ नए चेहरों के साथ पुराने खेल की वापसी है?

आसनसोल का कोयला सिर्फ खदानों के अंदर ही नहीं जलता, बल्कि उसके ऊपर भी पैसों की आग लगातार सुलगती रहती है।
सरकारें बदलती हैं… चेहरे बदलते हैं… लेकिन सवाल वही रहता है—
क्या कभी खत्म होगा कोयला सिंडिकेट का यह खेल?

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