आसनसोल: आसनसोल सिटी बस स्टैंड में अव्यवस्थाओं और श्रमिकों के शोषण के खिलाफ गुरुवार को श्रमिक संगठन एएनटीटीयूसी (ANTTUC) के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन हुआ। सैकड़ों की संख्या में जुटे श्रमिकों ने मिनी बस चालकों और कर्मचारियों के शोषण, अवैध बसों के संचालन, वेतन में कटौती और मनमानी छंटनी के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के प्रमुख राजू अहलूवालिया ने किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए मांग की कि अवैध मिनी बसों पर रोक लगे, श्रमिकों का वेतन नियमित हो और छंटनी पर रोक लगाई जाए।
बिना लाइसेंस दौड़ रहीं मिनी बसें, कौन है जिम्मेदार?
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बस स्टैंड में दर्जनों अवैध मिनी बसें बेधड़क दौड़ रही हैं, जिनके पास कोई वैध लाइसेंस नहीं है। इससे अधिकृत बस ऑपरेटरों को नुकसान हो रहा है और सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। सवाल उठता है कि प्रशासन इन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
मिनी बस कर्मचारियों का शोषण, छंटनी से नाराजगी
श्रमिकों का कहना है कि उन्हें बिना कारण नौकरी से निकाला जा रहा है, जबकि कई कर्मचारी वर्षों से सेवा दे रहे हैं। कई बस मालिक कम वेतन में अधिक घंटे काम करवाते हैं और विरोध करने पर डराने-धमकाने का काम करते हैं।
वेलफेयर फंड बना घोटाला, पैसा कहां जा रहा?
श्रमिकों का आरोप है कि बस मालिक और प्रशासन वेलफेयर फंड के नाम पर पैसा वसूलते हैं, लेकिन इसका कोई फायदा कर्मचारियों को नहीं मिलता। श्रमिकों ने मांग की कि इस फंड का सही इस्तेमाल हो और पारदर्शिता लाई जाए।
बस मालिकों पर दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बस मालिक कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, वेतन समय पर नहीं देते और सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। अगर कोई शिकायत करता है, तो उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग, नहीं तो बड़ा आंदोलन!
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो वे और बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। प्रदर्शन के कारण बस स्टैंड पर यातायात बाधित रहा और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या श्रमिकों को न्याय मिल पाता है या नहीं?










