कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों ने सियासी हलचल तेज कर दी है। राज्य में मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। यह आंकड़ा सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई है कि आखिर यह महज प्रक्रिया है या चुनावी समीकरण बदलने की बड़ी तैयारी।
📊 आंकड़ों में बड़ा बदलाव, चुनावी गणित पर असर
चुनाव आयोग द्वारा जारी विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार—
👉 कुल 60 लाख 6 हजार 675 मतदाता विचाराधीन थे।
👉 इनमें से 27 लाख 16 हजार 393 नाम हटा दिए गए।
👉 वहीं 32 लाख 68 हजार 119 नए नाम जोड़े गए।
👉 इससे पहले 28 फरवरी को जारी सूची में ही 63 लाख 66 हजार 952 नाम हटाए गए थे।
👉 दोनों आंकड़ों को मिलाकर अब तक कुल 90 लाख 83 हजार 345 नाम हटाए जा चुके हैं, यानी लगभग 91 लाख।
⚠️ अभी और बढ़ सकता है आंकड़ा
चुनाव आयोग के मुताबिक—
👉 22 हजार 163 मतदाताओं के मामलों का निपटारा हो चुका है, लेकिन अभी ई-हस्ताक्षर बाकी हैं।
👉 जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, हटाए गए नामों की संख्या और बढ़ सकती है, वहीं कुछ नए नाम भी जुड़ सकते हैं।
📉 मतदाताओं की कुल संख्या में उतार-चढ़ाव
विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया से पहले—
👉 राज्य में कुल 7 करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 मतदाता थे।
👉 इसके बाद ड्राफ्ट सूची और अंतिम सूची में लगातार बदलाव के चलते मतदाताओं की संख्या में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
👉 अब नए नाम जुड़ने के बाद कुल मतदाता संख्या में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
🏙️ जिला वार आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
📍 मुर्शिदाबाद
👉 सबसे ज्यादा असर मुर्शिदाबाद जिले में देखा गया।
👉 यहां कुल 7 लाख 48 हजार 959 नाम हटाए गए।
📍 उत्तर 24 परगना
👉 यहां कुल 12 लाख 60 हजार 96 नाम हटाए गए, जो बेहद बड़ा आंकड़ा है।
📍 मालदा
👉 मालदा में कुल 4 लाख 59 हजार 530 नाम हटाए गए।
📍 कोलकाता दक्षिण
👉 यहां कुल 2 लाख 49 हजार 619 नाम सूची से हटे।
📍 कोलकाता उत्तर
👉 कुल 4 लाख 47 हजार 475 नाम हटाए गए।
📍 पूर्व मेदिनीपुर
👉 यहां 1 लाख 65 हजार 345 नाम हटाए गए।
🔍 क्या है इस बड़े बदलाव की वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि—
👉 यह प्रक्रिया डुप्लिकेट नाम हटाने, मृत मतदाताओं को सूची से निकालने और गलत प्रविष्टियों को सुधारने के लिए की जाती है।
👉 हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने से राजनीतिक दलों के बीच संदेह और आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।
⚡ सियासत गरम, पार्टियों की बढ़ी चिंता
विपक्षी दलों का आरोप है कि—
👉 इतने बड़े स्तर पर नाम हटने से चुनावी परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि—
👉 यह पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया है और चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए जरूरी है।
🚨 हर वोट की कीमत, हर नाम पर नजर
इस घटनाक्रम के बाद अब सभी राजनीतिक दल—
👉 हर बूथ पर मतदाता सूची की बारीकी से जांच कर रहे हैं
👉 और छूटे हुए नामों को जोड़ने के लिए अभियान चला रहे हैं
👉 साफ है कि इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव सिर्फ रैलियों और नारों से नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट के हर आंकड़े पर तय होगा।
🔥 नतीजों पर पड़ सकता है बड़ा असर
करीब 91 लाख नाम हटने और लाखों नए नाम जुड़ने से—
👉 राज्य का पूरा चुनावी समीकरण बदल सकता है।
👉 अब देखना दिलचस्प होगा कि यह आंकड़े आखिरकार किस पार्टी के पक्ष में जाते हैं और किसके लिए चुनौती बनते हैं। 🔥















