कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी होने की तारीख को लेकर चल रहा सस्पेंस आखिरकार मंगलवार शाम खत्म हो गया। चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी कर साफ कर दिया है कि फाइनल वोटर लिस्ट अब 14 फरवरी के बजाय 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। यानी आयोग ने समय सीमा को दो सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची का मुद्दा काफी संवेदनशील माना जा रहा है।
📌 क्यों बढ़ाई गई तारीख?
सूत्रों के अनुसार उत्तर कोलकाता, दक्षिण 24 परगना और मालदा जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी सुनवाई निर्धारित समय तक पूरी नहीं हो पाई। पहले इन सुनवाइयों की अंतिम तिथि 7 फरवरी तय की गई थी, लेकिन प्रक्रिया लंबित रहने के कारण आयोग को नई समय सीमा तय करनी पड़ी।
चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने मंगलवार को दिल्ली में पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के साथ विस्तृत बैठक की। इसी बैठक में समीक्षा के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तिथि 28 फरवरी तय की गई।
🗳️ अब क्या होगा आगे?
जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि लंबित सुनवाई की प्रक्रिया अब 14 फरवरी तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद सभी आपत्तियों और दावों का निपटारा कर 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची सार्वजनिक की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने यह कदम उठाया है। हालांकि, राजनीतिक दल इस फैसले को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
🔎 चुनावी माहौल में बढ़ी सरगर्मी
राज्य में चुनावी तैयारियां तेज हो रही हैं और ऐसे समय में मतदाता सूची की तारीख बढ़ना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। विपक्षी दल जहां प्रक्रिया की निष्पक्षता पर नजर बनाए हुए हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे प्रशासनिक आवश्यकता बता रहा है।
अब सभी की निगाहें 28 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि अंतिम मतदाता सूची में कितने नए नाम जुड़े और कितने हटाए गए। चुनावी समीकरणों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।











