मतदाता सूची से पहले चुनाव की आहट! बंगाल में बूथ पुनर्विन्यास योजना रद्द

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा प्रशासनिक और चुनावी संकेत सामने आया है। पूर्ण मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले ही विधानसभा चुनाव की घोषणा की संभावना तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पूरी अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले भी चुनाव कार्यक्रम घोषित करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

📢 चुनाव आयोग की रणनीति में बड़ा बदलाव

चुनाव आयोग के अनुसार, नामांकन की अंतिम तिथि तक जो भी मतदाता सूची उपलब्ध होगी, उसी के आधार पर चुनाव प्रक्रिया संचालित की जाएगी। यानी अंतिम संशोधित सूची का इंतजार किए बिना भी चुनावी कार्यक्रम आगे बढ़ सकता है। इससे राज्य में चुनावी गतिविधियां और सियासी सरगर्मी अचानक तेज होने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक, मसौदा मतदाता सूची से 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे। हालांकि अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद भी हटाए गए नामों का सटीक आंकड़ा तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाएगा। आयोग ने संकेत दिया है कि सूची चरणबद्ध तरीके से जारी की जा सकती है और उन्हें भी अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा।

📋 अंतिम सूची और चरणबद्ध प्रकाशन पर फोकस

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बताया कि आगामी शुक्रवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत 28 फरवरी के बाद भी ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और ‘अनमैप्ड कैटेगरी’ से जुड़े मामलों की जांच जारी रहते हुए सूची चरणों में जारी की जा सकती है।
इस पूरी प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुल कितने मतदाताओं के नाम जोड़े गए या हटाए गए।

🏫 बूथ पुनर्विन्यास योजना स्थगित, 80,681 बूथ यथावत

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बूथ पुनर्विन्यास की बड़ी योजना को फिलहाल रद्द कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है कि राज्य में मौजूद कुल 80,681 मतदान केंद्र यथावत रहेंगे।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण मतदाताओं की अंतिम संख्या तय नहीं हो सकी है। इसी वजह से बूथों के पुनर्विन्यास की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया।

हालांकि, बहुमंजिला इमारतों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में 60 से 70 अतिरिक्त बूथ जोड़ने की संभावना जताई गई है। पहले आयोग ने संकेत दिया था कि 1,200 से अधिक मतदाता होने पर नया बूथ बनाया जाएगा, लेकिन वर्तमान स्थिति में पुराने बूथों को ही बनाए रखने का निर्णय लिया गया है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का असर

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मिश्रा की पीठ ने स्पष्ट किया है कि 28 फरवरी अंतिम मतदाता सूची जारी करने की समयसीमा है। हालांकि यदि विसंगतियों की जांच पूरी नहीं होती है, तो आयोग को चरणबद्ध तरीके से सूची प्रकाशित करने की अनुमति रहेगी।

🧭 सियासी समीकरण और चुनावी माहौल गरम

विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची के संशोधन और चुनाव कार्यक्रम की संभावित जल्द घोषणा से राज्य की राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी। विभिन्न राजनीतिक दल पहले ही जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने में जुट गए हैं।
ऐसे में अंतिम मतदाता सूची, बूथ संरचना और चुनाव तिथि — तीनों ही कारक आने वाले विधानसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरण को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

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