पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में राज्य के मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग के निर्देशों पर की गई कार्रवाई की अमल रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा के भीतर आयोग को सौंप दी है।
इससे पहले आयोग ने निर्देशों के पालन में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए 17 फरवरी शाम साढ़े पांच बजे तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया था। समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल होने से फिलहाल प्रशासन ने राहत की सांस ली है, लेकिन कई अहम बिंदुओं पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
बीएलओ मानदेय और एफआईआर पर सवाल बरकरार
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के बढ़े हुए मानदेय के भुगतान को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसके अलावा चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमले के मामलों में दर्ज एफआईआर और की गई कार्रवाई को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।
इन मुद्दों को लेकर आयोग पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। माना जा रहा है कि समीक्षा के दौरान इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
असम दौरे पर आयोग, लौटकर होगी समीक्षा
इस बीच चुनाव आयोग का दल असम दौरे पर है। आयोग ने मुख्य सचिव द्वारा अमल रिपोर्ट प्राप्त होने की पुष्टि की है और कहा है कि दौरे से लौटने के बाद रिपोर्ट की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के बाद आवश्यक निर्देश और कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि आयोग पहले ही सात अधिकारियों को निलंबित कर चुका है, जिससे यह संकेत मिला है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चुनाव घोषणा से पहले सख्त संदेश
सूत्रों का कहना है कि यदि चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पहले राज्य सरकार आयोग के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं करती है, तो चुनाव घोषित होने के बाद आयोग स्वयं अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए निर्देशों को लागू कराने की कार्रवाई कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले आयोग का यह सख्त रुख राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को संदेश देने के साथ-साथ निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है।
अब सबकी नजर आयोग की विस्तृत समीक्षा और संभावित अगली कार्रवाई पर टिकी है।











