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आसमान छूती कीमतें, सब्जियों छूना भी दुभर हो गया

sabji

लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं l नए सांसदों ने भी शपथ ले ली है, लेकिन आम लोगो का हाल वही है जैसे वे थे। उनके लिए कोई समाधान नहीं है l दक्षिण बंगाल में अभी भारी बारिश शुरू नहीं हुई है l तूफान या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा से खेती को नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इसके बावजूद लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं l कीमतों में कमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं l सभी सब्जियों के दाम लगातार बढ़ते जा रहें है l आम आदमी का सबसे ज्यादा पैसा आलू, प्याज, अदरक, लहसुन खरीदने में खर्च होता है l ज्यादातर लोग पटल, बैंगन, कद्दू, झींगा, चिचिंहाँ खरीदने के लिए रुक रहे हैं। किसी को याद नहीं कि इससे पहले कभी बैंगन 100 रुपया प्रति किलो हुआ हो। उसके बाद जब भारी मॉनसून बारिश शुरू होगी तो कई लोग आशंका जता रहे हैं कि खेती के नुकसान के कारण सब्जियों के दाम बढ़ जाएंगे l ऐसे में सवाल उठता है कि राज्य सरकार की प्रवर्तन शाखा टास्क फोर्स क्या कर रही है? लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद सामान्य सरकारी कामकाज शुरू हो गया है l लेकिन बाजार में सब्जियों की असामान्य कीमतों पर नियंत्रण के लिए कोई सरकारी पहल नहीं हो रही है l पिछले दिनों देखा गया है कि सब्जियों के दाम बढ़ने पर टास्क फोर्स के सदस्य बाजार में जाकर चेतावनी देते थे l जमाखोरी रोकने अक्सर प्रयास किया जाता था। लेकिन इस बार टास्क फोर्स के सदस्य बाजार में नजर नहीं आ रहे हैं l हालाँकि, टास्क फोर्स के सदस्यों का दावा है कि वे स्थिति पर नज़र रख रहे हैं और बाज़ार का दौरा करेंगे। लेकिन इस निगरानी का कोई वास्तविक प्रतिबिंब नहीं है l आम लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए राज्य सरकार ने सुफल बांग्ला स्टॉल पर सब्जियों की बिक्री की व्यवस्था की है l लेकिन इस बार सुफल बांग्ला स्टॉलों पर सब्जियों की कीमत भी ऊंची है l नतीजतन सरकार की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं l

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