कुल्टी में बड़ा सियासी झटका! हजारों तृणमूल समर्थक भाजपा में शामिल, गरमाई राजनीति

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आसनसोल के कुल्टी विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया। तृणमूल नेता स्वरूप चौधरी के नेतृत्व में हजारों की संख्या में तृणमूल नेता और समर्थकों ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस योगदान कार्यक्रम में विशेष रूप से राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान भारी भीड़ और समर्थकों की मौजूदगी ने इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश किया, जिसके बाद क्षेत्र में सियासी चर्चाएं तेज हो गईं। भाजपा समर्थकों ने इसे संगठन की मजबूती और जनसमर्थन का संकेत बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।

आसनसोल नगर निगम के मेयर परिषद सदस्य गुरदास चटर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होने वाले अधिकांश लोग पहले से ही भाजपा से जुड़े थे और अब केवल दोबारा शामिल कराकर इसे बड़ा कार्यक्रम दिखाया गया है। उनके अनुसार यह “सिर्फ दिखावे की राजनीति” है।

गुरदास चटर्जी ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए गंभीर आरोप भी लगाए और कहा कि चुनाव से पहले इस तरह के कार्यक्रम जनता को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह के दलबदल से तृणमूल कांग्रेस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और पार्टी जमीनी स्तर पर मजबूत बनी हुई है।

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कुल्टी और आसनसोल औद्योगिक क्षेत्र में दलबदल की राजनीति तेज हो सकती है। स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने के लिए दोनों दल लगातार शक्ति प्रदर्शन में जुटे हैं।

तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व, खासकर स्वरूप चौधरी के समर्थकों के भाजपा में जाने की खबर ने क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण को नया मोड़ दे दिया है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी इसे जनता के विश्वास का परिणाम बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक नाटक करार दे रही है।

कुल्टी में हुए इस बड़े योगदान कार्यक्रम के बाद पूरे आसनसोल औद्योगिक बेल्ट में सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। चुनावी माहौल के बीच इस घटनाक्रम को आगामी राजनीतिक रणनीति और टिकट वितरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में और कितने स्थानीय नेता दलबदल करते हैं और इसका विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ता है।

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