सुप्रीम कोर्ट में SIR याचिकाओं पर 9 दिसंबर को सुनवाई, बांग्लादेश से आकर बंगाल में बसे लोगों से जुड़ा मामला

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👉 राज्य के 2208 बूथ पर 100% फॉर्म वापस, दावा- ऐसा संभव ही नहीं, CEO ने रिपोर्ट मांगी

कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट बंगाल में SIR की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर 9 दिसंबर को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आए शरणार्थियों की तरफ से दायर एक याचिका पर भी नोटिस जारी किया, जिन्हें 2019 के सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के तहत सर्टिफिकेट जारी करने में देरी के कारण मताधिकार से वंचित होने का डर है।

कोर्ट ने NGO आत्मदीप की याचिका पर EC से जवाब मांगा है। आत्मदीप ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 2014 से पहले भारत में आए हिंदू, बौद्ध, ईसाई और जैन शरणार्थियों के लिए सुरक्षा की मांग वाली PIL पर सुनवाई करने से मना कर दिया गया था, लेकिन उन्हें अभी तक सिटिजनशिप नहीं दी गई है।

पिटीशनर NGO की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट करुणा नंदी ने कहा कि बौद्ध, सिख, जैन और ईसाई समुदायों के शरणार्थी बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न से भागकर कानूनी कट-ऑफ तारीख से पहले पश्चिम बंगाल में बस गए हैं।

CAA के तहत उनके एप्लीकेशन अब तक प्रोसेस नहीं हुए हैं और वे SIR प्रोसेस के तहत वोटर लिस्ट में प्रोविजनल नाम शामिल करने की मांग कर रहे हैं। NGO ने कहा, “भले ही हम 2014 से पहले आ गए थे, लेकिन हमारे एप्लिकेशन प्रोसेस नहीं किए गए हैं।

SUPREEM COURT

बेंच ने कहा कि इस मामले की डिटेल में सुनवाई 9 दिसंबर को होगी, साथ ही पश्चिम बंगाल में SIR एक्सरसाइज को चुनौती देने वाली संबंधित पिटीशन पर भी सुनवाई होगी। CJI कांत ने कहा- हमारी प्रॉब्लम यह है कि हम सिर्फ इसलिए फर्क नहीं कर सकते कि कोई जैन है या कोई हिंदू है। उन्होंने कहा कि नागरिकता के मुद्दे की जांच केस-बाय-केस बेसिस पर करनी होगी।

दक्षिण 24 परगना, पुरुलिया, मुर्शिदाबाद और हावड़ा से आए मामले

इधर, पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बीच कई बूथ पर 100% एन्युमेरेशन फॉर्म डिजिटाइज्ड हो गए। निर्वाचन आयोग को 2208 पोलिंग स्टेशन में कुछ संदेह हुआ, जब यहां से अनकलेक्टेबल फॉर्म जीरो पाया गया।

अनकलेक्टेबल फॉर्म में डेथ, डुप्लीकेट, एब्सेंट और शिफ्टेड वोटर्स कैटेगरी हैं। निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर में इन बूथों पर एक भी अनकलेक्टेबल फॉर्म नहीं मिला, जबकि ऐसा संभव नहीं कि एक भी वोटर उन 4 कैटेगरी में न हो।

सूत्रों ने बताया कि ऐसे मतदान केंद्रों में सबसे अधिक 760 दक्षिण 24 परगना जिले में हैं, इसके बाद पुरुलिया में 228 और मुर्शिदाबाद में 226 मतदाता हैं। हावड़ा जिले में ऐसे 94 और कोलकाता में एक मतदान केंद्र है। पश्चिम बंगाल में वर्तमान में 294 विधानसभा क्षेत्रों में 78,000 से अधिक मतदान केंद्र हैं।

निर्वाचन आयोग ने सीईओ दफ्तर में इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। इसके बाद ही सीईओ मनोज अग्रवाल ने संबंधित जिलों के डीईओ को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।

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