नई दिल्ली: पत्रकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। अब पुलिस या प्रशासन किसी भी पत्रकार से उनके सूत्रों का खुलासा करने के लिए दबाव नहीं डाल सकती। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और 22 का हवाला देते हुए कहा कि पत्रकारों की स्वतंत्रता और गोपनीयता का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
👉 सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्रकारों को अपने सूत्र गोपनीय रखने का पूरा अधिकार है।
👉 पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी पत्रकारों पर दबाव बनाकर उनके सूत्रों का खुलासा नहीं करवा सकती।
👉 यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 19 (1) और 22 के तहत पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करता है।
👉 कोर्ट ने कहा कि सूत्रों की गोपनीयता मीडिया की स्वतंत्रता का मूल आधार है।
🔥 पत्रकारों के लिए बड़ी जीत, पुलिस अब नहीं कर सकेगी पूछताछ!
🔹 पत्रकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया।
🔹 मीडिया स्वतंत्रता को लेकर उठे सवालों के बीच यह फैसला मीडिया की आज़ादी को मज़बूती देगा।
🔹 कोर्ट ने यह भी कहा कि 1978 के प्रेस स्वतंत्रता अधिनियम के तहत किसी भी पत्रकार से उनके स्रोत का खुलासा नहीं करवाया जा सकता।
💥 मीडिया जगत में हलचल, पत्रकारों ने जताई राहत!
✔️ वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि यह फैसला प्रेस की स्वतंत्रता के लिए ऐतिहासिक है।
✔️ कई पत्रकारों ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया।
✔️ मीडिया संगठनों ने सरकार से भी अपील की कि पत्रकारों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाए।










