नई दिल्ली/कोलकाता:
सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव संभव है। चुनाव आयोग अब सुनवाई की समयसीमा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है, जिससे अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी हो सकती है।
वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार SIR से जुड़ी सुनवाई की अंतिम तिथि 7 फरवरी निर्धारित है, जबकि 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी थी। हालांकि, आयोग के सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनज़र सुनवाई के दिनों में वृद्धि की जा सकती है, और इसका सीधा असर अंतिम सूची की तारीख पर भी पड़ेगा। फिलहाल इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
📌 सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बदली स्थिति
चुनाव आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बुधवार को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। अदालत के निर्देशों के चलते न केवल सुनवाई की अवधि बढ़ सकती है, बल्कि पूरी SIR प्रक्रिया का टाइमलाइन भी आगे खिसक सकता है।
गौरतलब है कि सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के तहत सूचना संबंधी असंगतियों (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी) की सूची सार्वजनिक करने का आदेश दिया था। इसके बाद मंगलवार को शीर्ष अदालत ने इस विषय पर 10 बिंदुओं वाली विस्तृत गाइडलाइन जारी की।
🗂️ पंचायत से वार्ड कार्यालय तक सूची होगी सार्वजनिक
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार—
- ग्रामीण क्षेत्रों में यह सूची पंचायत भवन और ब्लॉक कार्यालयों में
- शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में
सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, ताकि आम नागरिक आसानी से इसे देख सकें।
सूची प्रकाशित होने के बाद जिन मतदाताओं ने अब तक दावा, आपत्ति या दस्तावेज जमा नहीं किए हैं, उन्हें अतिरिक्त 10 दिन का समय दिया जाएगा। दस्तावेज पंचायत या ब्लॉक कार्यालयों में जमा किए जा सकेंगे।
👥 कर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था पर भी जोर
निर्देशों में कहा गया है कि चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी होगी, ताकि सुनवाई और दस्तावेज़ प्राप्त करने की प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य के पुलिस महानिदेशक, संबंधित पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी की होगी।
📄 सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति का अधिकार
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि—
- मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से सुनवाई का अवसर दिया जाए
- माध्यमिक परीक्षा का एडमिट कार्ड (जन्मतिथि सहित) को माध्यमिक उत्तीर्ण प्रमाणपत्र के वैकल्पिक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा सकता है
📊 1.40 करोड़ नोटिस, 1.36 करोड़ लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी
आयोग सूत्रों के अनुसार, राज्य में लगभग 1 करोड़ 40 लाख मतदाताओं को दस्तावेज सत्यापन के लिए नोटिस भेजे गए हैं। इन मतदाताओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है—
- मैप्ड वोटर – जिनके नाम 2002 के SIR से जुड़े हैं
- अनमैप्ड वोटर – जिनके नाम 2002 के SIR से जुड़े नहीं हैं
- लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाले मतदाता – जिनकी संख्या लगभग 1.36 करोड़ है
⚖️ BLA-2 की मौजूदगी पर नरमी
हालांकि सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश अभी पूरी तरह प्राप्त नहीं हुआ है, इसके बावजूद मंगलवार को कुछ स्थानों पर BLA-2 प्रतिनिधियों की मौजूदगी पर आयोग के अधिकारियों ने आपत्ति नहीं जताई।
चूंछुड़ा-मगरा BDO कार्यालय में सुनवाई के दौरान कुछ BLA-2 प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिसे प्रक्रिया में पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।











