नई दिल्ली: म्यांमार और थाईलैंड में 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने तबाही मचा दी है। इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल के चेयरमैन संजय सिन्हा ने इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया और भारत सहित अमेरिका, जापान, नेपाल और भूटान जैसे देशों से मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि “इस विपदा की घड़ी में हमें मानवता के नाते एकजुट होकर सहयोग करना चाहिए।”
💥 8 लाख से अधिक लोग प्रभावित, हजारों की जान जाने का खतरा!
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र म्यांमार के मांडले शहर के पास था, जहां करीब 15 लाख लोग रहते हैं। इस भूकंप के झटके बैंकॉक, बांग्लादेश, चीन और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में भी महसूस किए गए। इस आपदा में हजारों लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है।
🏚️ म्यांमार में ऐतिहासिक धरोहरें ढहीं, पुल और सड़कें बर्बाद
➡️ 90 साल पुराना अवा ब्रिज इरावदी नदी में समा गया।
➡️ मांडले पैलेस का एक हिस्सा गिरा, रेलवे पुलों को भारी नुकसान।
➡️ यांगून-मांडले एक्सप्रेसवे पर एक सड़क पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ।
🙏 भारत ने भेजी 15 टन राहत सामग्री, संजय सिन्हा ने जताया आभार
भारत ने म्यांमार के लिए 15 टन राहत सामग्री भेजी, जिसमें तंबू, कंबल, स्लीपिंग बैग, दवाइयाँ, पानी शुद्धिकरण यंत्र, हाइजीन किट, सोलर लैंप और जनरेटर सेट शामिल हैं। संजय सिन्हा ने भारत को धन्यवाद देते हुए अन्य देशों से भी आगे आने की अपील की।
💬 संजय सिन्हा का बयान: “अब मदद ही सबसे बड़ा धर्म है!”
“भूगोल हमें अलग कर सकता है, लेकिन मानवता हमें जोड़ती है। इस आपदा में सभी देशों को एकजुट होकर मदद करनी चाहिए!” – संजय सिन्हा
🚨 क्या बढ़ेगी मौतों की संख्या? अंतरराष्ट्रीय मदद जरूरी!
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत होने की संभावना है और म्यांमार के पांच बड़े शहरों में इमारतें ढह गई हैं। इस भयावह स्थिति में राहत और बचाव कार्य तेज करने की जरूरत है।













