नाम घोषित होने से पहले ही सालानपुर में विधान उपाध्याय के समर्थन में दीवार लेखन

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सालानपुर | पश्चिम बर्धमान
पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव की तारीखों की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। न ही किसी राजनीतिक दल ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की है। इसके बावजूद पश्चिम बर्धमान जिले के बराबनी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां तेज होती दिखाई देने लगी हैं।

बराबनी विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधान उपाध्याय के नाम पर सालानपुर ब्लॉक के कई इलाकों में दीवार लेखन शुरू हो गया है। यह दीवार लेखन उस समय सामने आया है, जब पार्टी स्तर पर अभी किसी भी प्रत्याशी के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

🖌️ दीवारों पर दिखे नारे

सालानपुर ब्लॉक के विभिन्न गांवों और बस्तियों में दीवारों पर
“2026 में फिर से विधान उपाध्याय”,
“घर का बेटा, काम का बेटा – जोड़ा फूल चिन्ह पर विधान उपाध्याय को वोट दें”
जैसे नारे लिखे गए हैं।

कई जगहों पर लोगों से अपील की गई है कि आने वाले 2026 के विधानसभा चुनाव में बराबनी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विधान उपाध्याय को जोड़ा फूल चुनाव चिन्ह पर भारी मतों से विजयी बनाएं।

🌾 ‘आम लोगों की आवाज़’ माने जाते हैं विधान उपाध्याय

तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधान उपाध्याय बराबनी क्षेत्र में केवल एक विधायक नहीं, बल्कि आम लोगों की भावनाओं का प्रतीक बन चुके हैं। औद्योगिक क्षेत्र हो या ग्रामीण अंचल—उन्होंने हर स्तर पर जनता की समस्याओं को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि उनके कार्यकाल में सड़कों, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और श्रमिक समस्याओं को लेकर कई महत्वपूर्ण पहल की गईं। यही कारण है कि जनता के बीच उनके प्रति गहरा भरोसा और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिलता है।

⚠️ पार्टी ने नहीं दिया कोई निर्देश

हालांकि इस पूरे मामले पर सालानपुर ब्लॉक तृणमूल कांग्रेस के सह-उपाध्यक्ष भोला सिंह ने स्पष्ट किया है कि पार्टी की ओर से इस तरह के प्रचार को लेकर कोई आधिकारिक निर्देश नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा,
“यह दीवार लेखन पार्टी का कार्यक्रम नहीं है। यह पूरी तरह कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भावना और विश्वास का परिणाम है। विधान उपाध्याय लोगों के लिए सिर्फ विधायक नहीं, बल्कि घर के बेटे की तरह हैं। इसी वजह से कार्यकर्ता अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए।”

🗳️ चुनाव से पहले संकेत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह का दीवार लेखन आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जनता के रुझान और जमीनी समर्थन का संकेत देता है। हालांकि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद इस तरह के प्रचार पर प्रशासन की नजर भी तय मानी जा रही है।

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