आसनसोल: रामकृष्ण मिशन आश्रम प्राइवेट आईटीआई, आसनसोल में प्रशिक्षण पूरा करने वाले छात्रों के लिए समावर्तन सह प्रमाण-पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में पश्चिम बंगाल सरकार के राज्य मंत्री कल्याण चक्रवर्ती मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण पूरा करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
समारोह का माहौल उस समय विशेष रूप से भावनात्मक और प्रेरणादायक हो गया, जब प्रशिक्षण पूरा कर चुके विद्यार्थियों ने अपने संस्थान से मिले संस्कार और शिक्षा के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया। तकनीकी प्रशिक्षण के बाद रोजगार और कार्यक्षेत्र में प्रवेश करने जा रहे इन विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके भविष्य की जिम्मेदारियों और सामाजिक भूमिका पर भी केंद्रित रहा।
सेवा को बताया जीवन का महत्वपूर्ण आधार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री कल्याण चक्रवर्ती ने सेवा के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेवा के माध्यम से ही पूजा का भाव जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को ‘जीव सेवा ही शिव सेवा’ की भावना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
मंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता केवल तकनीकी ज्ञान या रोजगार प्राप्त करने से पूरी नहीं होती। व्यक्ति के व्यवहार, ईमानदारी, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भी उतनी ही अहम भूमिका होती है। कार्यक्षेत्र में प्रवेश करने के बाद विद्यार्थी जिस तरह अपने ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल करते हैं, उसी से उनकी वास्तविक पहचान बनती है।
उन्होंने कहा कि सेवा की भावना केवल किसी विशेष पेशे या संस्था तक सीमित नहीं है। अपने काम को ईमानदारी से करना, सहकर्मियों की मदद करना, जरूरतमंद व्यक्ति के प्रति संवेदनशील रहना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी सेवा का ही हिस्सा है।
प्रमाण-पत्र के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
मंत्री कल्याण चक्रवर्ती ने समावर्तन समारोह के महत्व को केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तक सीमित नहीं माना। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनके जीवन का एक नया चरण शुरू हो रहा है।
उन्होंने कहा कि संस्थान से प्रमाण-पत्र लेकर निकलना उपलब्धि जरूर है, लेकिन इसके साथ विद्यार्थियों के ऊपर सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दायित्व भी आता है। जब विद्यार्थी कार्यक्षेत्र में जाएंगे और अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करेंगे, तब इन जिम्मेदारियों की वास्तविक अहमियत उन्हें समझ में आएगी।
आईटीआई प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार योग्य तकनीकी कौशल उपलब्ध कराना है। औद्योगिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत लगातार बनी रहती है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए तकनीकी दक्षता के साथ कार्यस्थल के अनुशासन, सुरक्षा नियमों और पेशेवर आचरण को समझना भी महत्वपूर्ण है।
तकनीकी शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर
रामकृष्ण मिशन से जुड़े शिक्षण संस्थानों में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के साथ अनुशासन तथा मानवीय मूल्यों पर भी जोर दिया जाता है। आसनसोल जैसे औद्योगिक शहर में आईटीआई प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के सामने विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने के अवसर मौजूद हैं।
कार्यक्रम में दिए गए संदेश का केंद्र यही रहा कि विद्यार्थी अपने कौशल का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए ही न करें, बल्कि अपने काम के माध्यम से समाज और देश के विकास में भी योगदान दें। तकनीकी ज्ञान को जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ जोड़कर इस्तेमाल करने से ही उसका वास्तविक लाभ सामने आता है।
समारोह में विद्यार्थियों के लिए यह संदेश भी महत्वपूर्ण रहा कि नौकरी या व्यवसाय में आगे बढ़ते समय छोटी-बड़ी चुनौतियां सामने आना स्वाभाविक है। ऐसे समय में धैर्य, अनुशासन और सही आचरण व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
‘जीव सेवा ही शिव सेवा’ का संदेश
स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने सेवा को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि मानव सेवा को पूजा की भावना से जोड़कर देखा जा सकता है। किसी जरूरतमंद की सहायता करना, अपने काम के प्रति ईमानदार रहना और दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देना भी सेवा की व्यापक भावना का हिस्सा है।
‘जीव सेवा ही शिव सेवा’ का यह संदेश रामकृष्ण मिशन की विचारधारा से भी जुड़ा हुआ है। विद्यार्थियों के लिए यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तकनीकी शिक्षा उन्हें रोजगार का रास्ता दिखाती है, जबकि मानवीय मूल्य उन्हें उस ज्ञान का सही इस्तेमाल करने की दिशा देते हैं।
नई जिम्मेदारियों की ओर बढ़े विद्यार्थी
समावर्तन समारोह विद्यार्थियों के लिए उनके प्रशिक्षण जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव का प्रतीक रहा। प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के बाद अब उनके सामने रोजगार, उच्च प्रशिक्षण, कौशल विकास और अपने करियर को आगे बढ़ाने की नई चुनौतियां हैं।
आईटीआई के विद्यार्थियों के लिए तकनीकी कौशल को लगातार अपडेट करते रहना भी महत्वपूर्ण है। औद्योगिक क्षेत्र में मशीनरी, तकनीक और कार्यप्रणाली में बदलाव के साथ कर्मचारियों को भी नई तकनीकों के अनुरूप खुद को तैयार करना पड़ता है। ऐसे में प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सीखने की प्रक्रिया रुकती नहीं, बल्कि उसका एक नया चरण शुरू होता है।
समारोह में विद्यार्थियों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा और प्रशिक्षण का अंतिम उद्देश्य केवल प्रमाण-पत्र हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल और संस्कार के माध्यम से एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में आगे बढ़ना भी है।
आसनसोल के रामकृष्ण मिशन आश्रम प्राइवेट आईटीआई में आयोजित यह समावर्तन समारोह विद्यार्थियों के लिए यादगार अवसर बन गया। एक ओर उन्हें अपने तकनीकी प्रशिक्षण की उपलब्धि का प्रमाण-पत्र मिला, वहीं दूसरी ओर मंत्री कल्याण चक्रवर्ती के संबोधन के माध्यम से उन्हें सेवा, ईमानदारी, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी मिला। अब इन प्रशिक्षित युवाओं से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने कौशल का उपयोग कार्यक्षेत्र में पूरी निष्ठा के साथ करते हुए समाज और देश के विकास में भी योगदान देंगे।




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