👉 EC की बैठक में CEO का प्रस्ताव, हिंसा रोकना ही सर्व-प्रमुख लक्ष्य
कोलकाता (प्रेम शंकर चौबे) : पश्चिम बंगाल की वर्तमान विधानसभा की मियाद 5 मई 2026 को समाप्त हो रही है। उससे पहले, अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक राज्य विधानसभा चुनाव पूरा कर लिए जाने की योजना है। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को प्रकाशित होनी है। उससे पहले, निर्वाचन आयोग (EC) ने राज्य विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले विधानसभा चुनावों में पोलिंग फेज की संख्या आठ से घटाकर छह करने का प्रस्ताव चुनाव आयोग के अंदर आया है। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले राज्य में ज़्यादा सेंट्रल फोर्स तैनात करने का प्रस्ताव रखा गया है।
आयोग ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी और पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर (CEO) मनोज अग्रवाल के साथ विधानसभा चुनाव की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जरूरी बैठक की। मीटिंग में राज्य पुलिस के नोडल ऑफिसर आनंद कुमार भी मौजूद थे। सिर्फ बंगाल ही नहीं, अगले साल तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं।
बदलते जमानों के दौर में भी कई सालों से बंगाल में वोटिंग का मतलब अशांति और खून-खराबा रहा है। सिर्फ वोटिंग वाले दिन ही नहीं, बल्कि चुनाव के बाद होने वाली हिंसा भी इलेक्शन कमीशन को परेशान कर रही है। इसलिए, कमीशन हिंसा से निपटने के लिए कड़े एक्शन लेने के लिए शुरू से ही ब्लूप्रिंट तैयार करना चाहता है। कमीशन के अधिकारियों के एक ग्रुप के मुताबिक, पहले बिहार, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में वोटिंग के दौरान जान-माल का नुकसान और हिंसा आम बात थी। अब चुनाव के दौरान हिंसा को रोककर इसे त्योहार में बदलना मुमकिन हो गया है। हालांकि, बंगाल में यह स्थिति अब भी नहीं बदली है। सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से मीटिंग में राज्य के CEO मनोज अग्रवाल ने आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सेंट्रल फोर्स की संख्या बढ़ाने के साथ ही चुनावी चरणों की संख्या घटाने का प्रस्ताव रखा है।

2021 में राज्य विधानसभा चुनाव आठ फेज में हुए थे। बंगाल में पिछला लोकसभा चुनाव भी सात फेज में हुआ था। इस बार CEO दफ्तर दो से तीन फेज कम करके वोटिंग पूरी करना चाहता है। सूत्रों का दावा है कि इसके लिए और सेंट्रल फोर्स भी मांगी गई हैं। हालांकि, सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य में आखिर में कितनी फोर्स और कितने पुलिस ऑफिसर उपलब्ध होते हैं। सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग में यह तय हुआ कि राज्य पुलिस चुनाव के लिए ज़्यादा से ज़्यादा 35,000 फोर्स दे सकती है। चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान काले धन के फ्लो को रोकने के लिए, आयोग केंद्र और राज्य की अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके नाका चेकिंग पर भी ज़ोर दे रहा है। इसी वजह से, नाका चेकिंग के दौरान वेबकास्टिंग को ज़रूरी बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान, 1 मार्च से 13 अप्रैल के बीच पश्चिम बंगाल से 219 करोड़ रुपये की शराब और नशीले पदार्थ बरामद किए गए थे। इसमें से 13 करोड़ रुपये की बिना हिसाब की नकदी ज़ब्त की गई थी।
आयोग के सूत्रों के मुताबिक, CEO ने मीटिंग में राज्य की सुरक्षा पर एक रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पिछले चुनावों में कितनी केंद्रीय सेनाएँ तैनात की गई थीं और राज्य पुलिस की कितनी सेनाएँ हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में, पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बलों की 1,094 कंपनियाँ तैनात की गई थीं। पिछले राज्य विधानसभा चुनाव में केंद्रीय बलों की 1,100 से ज़्यादा कंपनियाँ मिली थीं।
सूत्रों के मुताबिक, इलेक्शन कमीशन के साथ मीटिंग के अलावा मनोज अग्रवाल होम मिनिस्ट्री के साथ भी एक अलग मीटिंग करने वाले हैं। चुनाव आयोग ने राज्य में सेंसिटिव और अल्ट्रा-सेंसिटिव बूथों की लिस्ट बनाने का काम शुरू कर दिया है। उस लिस्ट के आधार पर पोलिंग स्टेशनों की संख्या और सिक्योरिटी फोर्स की फाइनल आउटलाइन तैयार की जाएगी।











