पानागढ़ में गूंजे जय श्रीराम के नारे, रावण दहन का गवाह बना पूरा बाजार

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पानागढ़। दशहरा के पावन अवसर पर पानागढ़ बाजार में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रावण दहन का आयोजन धूमधाम से किया गया। लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। जैसे ही अग्नि की लपटों में रावण की विशाल प्रतिमा धधक उठी, मैदान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।

स्थानीय लोगों ने बताया कि पानागढ़ में रावण दहन की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। पहले यह आयोजन बाजार के विभिन्न हिस्सों में होता था, लेकिन अब स्थान की सुविधा के कारण इसे मंदिर के मैदान में ही नियमित रूप से मनाया जाता है। यहां जगह सीमित होने के कारण बड़े स्तर की माइकिंग नहीं की जाती, फिर भी कार्यक्रम का उत्साह देखते ही बनता है।

आयोजकों का कहना है कि रावण दहन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। इस आयोजन में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल होते हैं और श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश देते हैं।

जैसे ही रावण का पुतला धराशायी हुआ, लोगों ने आतिशबाज़ी और जयघोष के साथ विजयदशमी का जश्न मनाया। स्थानीय दुकानदारों ने भी विशेष सजावट और रोशनी से वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका विजय कर रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराया था। उसी स्मृति में आज भी पानागढ़ की धरती पर रावण दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है।

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