व्यक्तिगत विवाद या आस्था पर चोट? नदिया मूर्ति कांड से मचा हड़कंप

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बुधवार सुबह शांतिपुर थाना क्षेत्र के सर्बनंदी पाड़ा इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब स्थानीय लोकनाथ मंदिर के सामने एक कुम्हार के घर में रखी काली और सरस्वती की करीब 70 अर्द्धनिर्मित मूर्तियां टूटी हुई मिलीं।

घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

🎨 30 साल की मेहनत पर एक रात में पानी फिर गया
पीड़ित मूर्तिकार जयंत दास, जो पिछले 30 वर्षों से देवी-देवताओं की मूर्तियां बना रहे हैं, ने बताया कि

“रात के अंधेरे में किसी ने जानबूझकर मेरी 60 से 70 मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया। यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि हमारी आस्था पर भी चोट है।”

जयंत दास के अनुसार, इस तोड़फोड़ के पीछे अमित दास नामक स्थानीय युवक का हाथ होने का आरोप है। बताया गया कि अमित दास कुछ दिन पहले उनके घर आया था और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देकर गया था।

⚠️ नशे में झगड़ा, फिर रात में तोड़फोड़
आरोप है कि घटना वाली रात, जब जयंत दास मूर्तियां बना रहे थे, तभी अमित दास नशे की हालत में वहां पहुंचा, झगड़ा करने की कोशिश की और धमकी देकर चला गया। अगली सुबह मूर्तियां टूटी हुई मिलीं।

📹 CCTV फुटेज में पुष्टि, फिर भी गिरफ्तारी नहीं
शिकायत दर्ज होने के बाद शांतिपुर थाना पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में अमित दास और उसके भाई असित दास की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जिन्होंने कथित तौर पर घटना से एक दिन पहले भी मूर्तिकार को धमकाया था।

हालांकि, इस खबर के लिखे जाने तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, जिससे स्थानीय लोगों में नाराज़गी और बढ़ गई है।

🏛️ राजनीतिक घमासान: भाजपा का ममता सरकार पर हमला
इस घटना को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और पार्टी के आईटी सेल प्रमुख व बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर घटना की तस्वीरें साझा करते हुए आरोप लगाया कि—

“पश्चिम बंगाल में खतरनाक कट्टरपंथियों को संरक्षण दिया जा रहा है। शांतिपुर की यह घटना बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता पर सीधा हमला है।”

🛕 आस्था, सुरक्षा और प्रशासन पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा से पहले इस तरह की घटनाएं प्रतिमाशिल्पियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। लोगों की मांग है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।

पुलिस का कहना है कि सबूत जुटा लिए गए हैं और आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है, लेकिन इलाके में अब भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

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