आसनसोल (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के शासन में एक बार फिर किसानों के साथ अन्याय की दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। आसनसोल नगर निगम के वार्ड नंबर 14, कल्ला बायपास क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग की जमीन पर हरी-भरी फसलें उगाकर गुजारा कर रहे किसानों की मेहनत पर पीएचई विभाग (PHE Department) ने बुलडोजर चला दिया।
🛠️ पाइपलाइन का टेंडर बना किसानों की बर्बादी का सबब
पीएचई विभाग की पाइपलाइन बिछाने की योजना को कार्यान्वित करने के लिए नियुक्त ठेकेदार ने बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के सीधे खेतों पर बुलडोजर चला दिया। खेतों में लगी हरी सब्जियाँ, बैगन, टमाटर, भिंडी और लौकी जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं।
किसानों ने रोते हुए कहा –
“अगर एक नोटिस या दो दिन का समय दे देते, तो हम फसल हटा लेते। अब हमारे पास ना खाने को है, ना ही दो पैसे कमाने का जरिया।”
🚜 किसानों का दर्द: ‘हम गरीब हैं, हमारी रोटी छीन ली गई’
पीड़ित किसानों ने प्रशासन और ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें जानबूझकर अनदेखा किया गया, जबकि वह ज़मीन पर बीते कई वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। यह उनकी आजीविका का एकमात्र साधन था।
एक किसान ने कहा:
“अब हमारा परिवार भूखमरी की कगार पर है। सरकार को हमारे नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।”
📄 ठेकेदार और विभाग का पक्ष – ‘हमारे पास एनओसी है’
ठेकेदार और विभाग की दलील है कि उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से वैध एनओसी (NOC) प्राप्त किया है। यदि कोई उस जमीन पर अवैध रूप से खेती कर रहा था, तो वे उसके जिम्मेदार नहीं हैं।
लेकिन सवाल यह है:
👉 क्या एक सूचना देना मानवीयता नहीं थी?
👉 क्या गरीब किसानों की मेहनत की कोई कीमत नहीं?
📣 किसानों की मांग: मुआवजा दो या हम करेंगे धरना-प्रदर्शन
किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
🧾 प्रशासन की चुप्पी शर्मनाक – जनता का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा
इस घटना के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर गुस्सा भड़क उठा। लोगों ने ममता सरकार पर किसानों की अनदेखी और क्रूरता के आरोप लगाए।
#किसानों_के_साथ_न्याय #BulldozerOnFarmers #AsansolFasalVinas जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं।
🔴 यह रिपोर्ट बताती है कि सरकार की नीतियाँ जब ज़मीन पर बिना संवेदना के लागू होती हैं, तो सबसे पहले रोटी-रोज़ी कमाने वाला गरीब किसान ही कुचला जाता है।
क्या इन किसानों को मिलेगा न्याय? या एक और संघर्ष बनकर रह जाएगा ये हादसा?










