‘युवसाथी’ से युवाओं पर फोकस: ममता का नया दांव, चुनाव से पहले बड़ा ऐलान!

single balaji

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार ने ‘युवसाथी’ योजना के तहत नकद भत्ता वितरण का दायरा और बढ़ा दिया है। अब उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति पाने वाले छात्र-छात्राएं भी इस योजना से बाहर नहीं रहेंगे। यानी पढ़ाई के साथ नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को दोहरा सहारा मिलेगा।

लंबी कतारें, बड़ी उम्मीदें

रविवार और सोमवार को कोचबिहार से काकद्वीप तक, बांदवान से बिनपुर तक युवसाथी शिविरों में भारी भीड़ देखने को मिली।

  • हुगली के श्रीरामपुर में एक युवक अपनी पत्नी और चार महीने की बच्ची के साथ सुबह 8:30 बजे ही लाइन में लग गया।
  • बहरामपुर स्टेशन पर केरल से लौटे प्रवासी मजदूर ने घर जाने से पहले पंजीकरण कराया।
  • हल्दिया में एक 28 वर्षीय युवक ने एक दिन की मजदूरी छोड़कर आवेदन किया।

कतारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। विपक्ष इसे राज्य में बेरोजगारी की “करुण तस्वीर” बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस इसे जनता के भरोसे का संकेत बता रही है।

कौन कर सकता है आवेदन?

  • न्यूनतम योग्यता: माध्यमिक (10वीं) पास
  • आयु सीमा: 21 से 40 वर्ष
  • शर्त: बेरोजगार होना अनिवार्य
  • जो अन्य सरकारी भत्ते ले रहे हैं, वे पात्र नहीं
  • ऐक्यश्री, स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप या कन्याश्री पाने वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं
  • लक्ष्मी भंडार योजना के लाभार्थी पात्र नहीं होंगे

आवेदन कैसे करें?

सरकारी शिविर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।
मुख्य दस्तावेज:

  • माध्यमिक की मार्कशीट
  • आधार कार्ड
  • बैंक खाता विवरण
  • जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
  • परिवार और पते का विवरण

भीड़ को देखते हुए ऑनलाइन पोर्टल तय समय से पहले खोल दिया गया है।

5000 करोड़ का बजट, 1 अप्रैल से लागू

राज्य बजट में इस योजना के लिए 5000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 1 अप्रैल से पात्र युवाओं के खातों में राशि आनी शुरू हो जाएगी। अधिकतम पांच वर्षों तक यह भत्ता मिलेगा, लेकिन नौकरी मिलने पर लाभ बंद हो जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2021 में लक्ष्मी भंडार योजना से महिला मतदाताओं का समर्थन पाने के बाद अब सरकार युवाओं—खासकर पुरुष मतदाताओं—तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

सियासी संदेश क्या है?

15 वर्षों की सत्ता के बाद एंटी-इनकंबेंसी की चर्चा के बीच यह योजना सरकार के लिए बड़ा दांव साबित हो सकती है। युवाओं की बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक दबाव के बीच यह नकद सहायता राहत का संदेश दे रही है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह योजना सिर्फ आर्थिक सहारा बनेगी या 2026 में सियासी समीकरण भी बदलेगी।

ghanty

Leave a comment