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ममता के दिल्ली दौरे के बीच एनसीपीआई सांसदों की बैठक, क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?

Moutushi · 8 October 2026, 10:25 AM

ममता के दिल्ली दौरे के बीच एनसीपीआई सांसदों की बैठक, क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के बीच राजधानी की राजनीति में एक साथ कई घटनाक्रमों ने चर्चा बढ़ा दी है। एक ओर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों का आंदोलन तेज है और ममता बनर्जी के दिल्ली में विपक्षी नेताओं के साथ सक्रिय रहने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रीय नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ जाने वाले 20 सांसदों की बैठक भी महत्वपूर्ण समय पर होने जा रही है। ऐसे में दोनों घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

एसआईआर के मुद्दे पर दिल्ली में विपक्ष की सक्रियता

एसआईआर और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों का दिल्ली में विरोध लगातार तेज हो रहा है। विपक्ष की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है। सात अक्टूबर को दिल्ली में विपक्षी सांसदों और नेताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई हुई थी। इसके बाद आठ अक्टूबर को भी जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई।

इसी राजनीतिक माहौल के बीच ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, उनका दिल्ली पहुंचना इंडिया गठबंधन के नेताओं की संभावित गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए विपक्षी गठबंधन ने प्रतिनिधिमंडल का समय मांगा है। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से प्रतिनिधिमंडल को 10 सदस्यों तक सीमित रखने की बात सामने आई है। हालांकि, मुलाकात का अंतिम समय आधिकारिक रूप से तय होने को लेकर उस समय तक पुष्टि नहीं हुई थी।

10 अक्टूबर के कार्यक्रम पर भी नजर

एसआईआर के विरोध और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में आने वाले दिनों में भी विरोध कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। ककरोच जनता पार्टी की ओर से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कार्यक्रम की तैयारी की खबर है। इस पूरे आंदोलन के बीच ममता बनर्जी की दिल्ली मौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो गई है।

ममता बनर्जी पहले ही एसआईआर के मुद्दे को विपक्ष की सामूहिक लड़ाई बता चुकी हैं। दो अक्टूबर को उन्होंने कहा था कि यह केवल किसी एक दल का मुद्दा नहीं बल्कि विपक्ष की सामूहिक चिंता है। इंडिया गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर संयुक्त रूप से आगे बढ़ने की बात भी सामने आई है।

दूसरी तरफ एनसीपीआई सांसदों की अहम बैठक

ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के समानांतर एनसीपीआई से जुड़े 20 सांसदों की गतिविधियां भी राजनीतिक नजरों के केंद्र में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सुदीप बंद्योपाध्याय के आवास पर एनसीपीआई सांसदों की बैठक होने वाली है। इसे फिलहाल पार्टी की ओर से सामान्य ‘गेट-टुगेदर’ बताया जा रहा है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इस बैठक को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

सबसे अहम मुद्दा इन सांसदों की सदस्यता और उनके खिलाफ चल रही अयोग्यता प्रक्रिया है। लोकसभा सचिवालय ने इन 20 सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

स्पीकर के जवाब पर टिकी नजर

मामला अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष चल रही प्रक्रिया से जुड़ा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 20 एनसीपीआई सांसदों की ओर से जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है। सुदीप बंद्योपाध्याय ने सात अक्टूबर को ओम बिरला से बातचीत कर और समय देने का अनुरोध किया था। इससे पहले भी सांसदों की ओर से समय बढ़ाने की मांग की जा चुकी है।

इस पूरी प्रक्रिया के बीच सांसदों की बैठक का महत्व बढ़ जाता है। बैठक में कानूनी और संसदीय रणनीति के साथ आगे की कार्रवाई पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, बैठक में क्या फैसला होगा, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

तृणमूल से अलग हुए 20 सांसदों का मामला

तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई के साथ जाने वाले 20 सांसदों को लेकर पिछले कई महीनों से विवाद जारी है। इनमें काकली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, रचना बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, देव और सायनी घोष समेत कई नाम शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इनके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, एनसीपीआई खेमे की ओर से अपने राजनीतिक कदम को लेकर अलग दलीलें दी गई हैं।

इससे पहले इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर जल्द फैसला कराने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस चरण में लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी नहीं किया था।

क्या बदल सकता है राजनीतिक समीकरण?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे और एनसीपीआई सांसदों की बैठक से कोई निश्चित राजनीतिक फैसला सामने आएगा। लेकिन दोनों घटनाक्रम एक ही समय पर होने के कारण राष्ट्रीय राजनीति में इन पर नजर बनी हुई है।

एक तरफ एसआईआर को लेकर विपक्षी दल संयुक्त रूप से निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ 20 सांसदों की सदस्यता से जुड़ा मामला लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में आने वाले दिनों में राष्ट्रपति से संभावित मुलाकात, दिल्ली के विरोध प्रदर्शन और एनसीपीआई सांसदों के जवाब पर होने वाली कार्रवाई—तीनों घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाले मुद्दों के रूप में देखे जा रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि दिल्ली में होने वाली बैठकों और बातचीत के बाद अगला राजनीतिक कदम क्या सामने आता है।

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