कोलकाता:
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। रेड रोड स्थित नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद राज्य और देश के नाम अपने संदेश में ममता बनर्जी ने इतिहास, पहचान और लोकतंत्र को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास को भुलाने और महापुरुषों का अपमान करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों के प्रति असहिष्णुता और अनादर देश की आत्मा पर हमला है।
🗣️ ‘बंगाल चुप नहीं बैठेगा’
ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंगाल के लोग इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने नेताजी के प्रसिद्ध नारे “दिल्ली चलो” का जिक्र करते हुए कहा,
“नेताजी ने दिल्ली चलो का नारा दिया था, लेकिन आज वही दिल्ली लगातार साजिश रच रही है।”
🏛️ नीति आयोग पर सवाल
मुख्यमंत्री ने योजना आयोग को हटाकर नीति आयोग बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज तक यह साफ नहीं हो पाया कि नीति आयोग का असली उद्देश्य क्या है और इससे आम जनता को क्या लाभ मिला।
🇮🇳 नेताजी जयंती को राष्ट्रीय अवकाश न बनाने पर आपत्ति
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि केंद्र में सरकारें बदलती रहीं, लेकिन आज तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित नहीं किया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नेताजी देश के लिए विदेश गए और वापस नहीं लौटे, इसलिए उनके जन्मदिन पर सम्मान दिया जाना और भी ज़रूरी है।
🗳️ SIR और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“जिन लोगों ने फांसी के मंच पर अपनी जान दी, वे कहां गए? सबसे ज़्यादा बलिदान बंगाल ने दिया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय कुछ लोग टेलीप्रॉम्प्टर में दो-चार बंगाली शब्द लिखकर आ जाते हैं और खुद को बंगाल का हितैषी बताते हैं। ममता ने कहा कि इतनी मौतों की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग को लेनी चाहिए, और सवाल उठाया कि इस पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
✍️ नाम को लेकर तीखा तंज
अपने भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने बेहद तीखे लहजे में कहा,
“मैं अंग्रेज़ी में ममता बनर्जी लिखती हूं और बंगाली में बंद्योपाध्याय लिखती हूं। इतना सा भी जो नहीं जानते, उन्हें धिक्कार।”
मुख्यमंत्री के इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी प्रतिक्रियाएं और तेज़ होने की संभावना है।











