“तृणमूल को हराने के चक्कर में भाजपा को वोट दिया” – वाम नेता अशोक भट्टाचार्य का बड़ा कबूलनामा

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सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बयान सामने आया है। वरिष्ठ वाम नेता और राज्य के पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने स्वीकार किया है कि पिछले तीन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को हराने के नाम पर वामपंथियों का एक हिस्सा भारतीय जनता पार्टी को वोट देता रहा है

उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि अब इस गलती को दोहराया नहीं जाना चाहिए

यह टिप्पणी उन्होंने सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम की मौजूदगी में सिलीगुड़ी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

“अब ऐसी गलती मत कीजिए”

कार्यक्रम में बोलते हुए अशोक भट्टाचार्य ने कहा,
“पिछले तीन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को हराने के नाम पर वामपंथियों ने भाजपा को वोट दिया है। अब इस गलती को दोबारा मत कीजिए।”

हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर ज्यादा विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके इस बयान ने वाम वोट बैंक के भाजपा की ओर जाने की चर्चा को फिर से हवा दे दी है

आंकड़ों में दिखा वोटों का बदलाव

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव तक के आंकड़ों में यह साफ संकेत मिला है कि वामपंथी वोटों का एक हिस्सा भाजपा की ओर चला गया था

हालांकि सीपीएम ने कभी आधिकारिक रूप से इस वोट ट्रांसफर को स्वीकार नहीं किया था, लेकिन अब वरिष्ठ नेता अशोक भट्टाचार्य के इस बयान को कई लोग एक तरह की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति मान रहे हैं।

उसी दिन आया बयान जब ब्रिगेड में मोदी की रैली

दिलचस्प बात यह है कि अशोक भट्टाचार्य का यह बयान उसी दिन सामने आया, जब कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल जनसभा आयोजित की गई थी

उस रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ देखने को मिली थी। इसी बीच अशोक भट्टाचार्य के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें देखा जा सकता है कि उनके बगल में बैठे मोहम्मद सलीम उनकी बातों को ध्यान से सुन रहे हैं।

शिष्य ने ही चुनाव में दी थी मात

साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी सीट से सीपीएम के उम्मीदवार अशोक भट्टाचार्य ही थे

चुनाव से ठीक पहले उनके करीबी और शिष्य माने जाने वाले शंकर घोष ने सीपीएम छोड़कर भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली थी। बाद में भाजपा ने शंकर घोष को ही अशोक भट्टाचार्य के खिलाफ उम्मीदवार बनाया

चुनाव परिणाम आने पर शिष्य शंकर घोष ने अपने ही गुरु अशोक भट्टाचार्य को हरा दिया, जिसने उस समय भी काफी राजनीतिक चर्चा पैदा की थी।

फिलहाल सक्रिय राजनीति से थोड़ी दूरी

सीपीएम के अंदर उम्र संबंधी नियमों के कारण फिलहाल अशोक भट्टाचार्य सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उन्हें राजनीतिक हलकों में “उत्तर बंगाल का मुख्यमंत्री” तक कहा जाता था।

ऐसे में चुनावी माहौल के बीच वाम वोटों के भाजपा की ओर जाने को लेकर उनका सार्वजनिक बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है

चुनाव से पहले बढ़ सकती है सियासी गर्मी

पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे समय में वामपंथी वोटों के संभावित बिखराव को लेकर यह बयान राजनीतिक रणनीति और गठबंधनों पर भी असर डाल सकता है

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में इस बयान को लेकर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है

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