कुल्टी (आसनसोल):
हावड़ा में कल हुई दर्दनाक पूलकार दुर्घटना में 3 छात्रों की मौत के बाद पूरा राज्य सदमे में है। इसके बावजूद आसनसोल जिले के कुल्टी इलाके में स्कूल बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक उदासीनता खुलकर सामने आ गई।
शनिवार सुबह जीटी रोड पर कुल्टी स्थित एक निजी स्कूल के सामने ओवरलोडेड पूलकारें और टो–टो मेंぎढ़ी हुई बच्चों की भीड़ देखने को मिली। मानो यह दृश्य किसी आने वाले हादसे की चेतावनी दे रहा हो।
ओवरलोडेड पूलकारें—चलती फिरती “टिक-टिक टाइम बम”
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पूलकारों में
- क्षमता से दोगुने बच्चे
- सीट बेल्ट का अभाव
- ढीले-ढाले दरवाजे
- बिना यूनिफॉर्म वाले ड्राइवर
सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था।
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं—
क्या इन वाहनों के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट है?
क्या ड्राइवरों के पास स्कूल वाहन चलाने का लाइसेंस है?
क्या बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं?
हावड़ा हादसे के बाद भी प्रशासन क्यों सो रहा है?
हावड़ा के दर्दनाक हादसे के बाद राज्य सरकार ने सख़्ती के संकेत दिए थे, लेकिन कुल्टी में स्थितियां बिल्कुल उलट दिखीं।
यहाँ
- न कोई पुलिस चेकिंग
- न परिवहन विभाग की टीम
- न स्कूल प्रशासन की निगरानी
कुछ भी नज़र नहीं आया।
इससे अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
एक अभिभावक ने कहा:
“हर सुबह हम अपने बच्चों को डर के साए में भेजते हैं। हादसा होने पर ही क्या प्रशासन जागेगा?”
स्कूल प्रशासन और लोकल प्रशासन पर सवाल
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं—
- बच्चों की सुरक्षा नीति क्या है?
- स्कूल बसों की जांच क्यों नहीं होती?
- आउटसोर्स पूलकारों को कैसे अनुमति दी जा रही है?
अब बड़ा सवाल—एक्शन कब?
लोग अब यह पूछ रहे हैं कि:
- इन वाहनों की नियमित जांच कब शुरू होगी?
- ड्राइवरों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कब होगा?
- क्या बच्चों की सुरक्षा पर राज्यव्यापी नीति बनेगी?
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो कुल्टी में भी बड़ा हादसा होने में समय नहीं लगेगा।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग
- तुरंत स्पेशल ड्राइव
- ओवरलोडिंग पर भारी जुर्माना
- बिना फिटनेस वाले वाहन सीज़
- स्कूल प्रशासन को नोटिस
- बच्चे ले जाने वाले वाहनों पर GPS और कैमरा अनिवार्य











