पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित काजी नजरुल विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। ‘Nazrul Centre for Social & Cultural Studies’ (NCSCS) के तत्वावधान में आयोजित इस शैक्षणिक कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रख्यात विद्वानों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के शिक्षामंत्री ब्रात्य बसु, मंत्री मलय घटक तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) उदय बंद्योपाध्याय समेत अनेक विशिष्ट हस्तियां उपस्थित रहीं।
नजरुल के दर्शन पर वैश्विक विमर्श
संगोष्ठी का मुख्य केंद्र महान विद्रोही कवि Kazi Nazrul Islam के दर्शन, समतावादी चिंतन और साहित्यिक योगदान पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि नजरुल की विचारधारा आज भी समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की शक्ति रखती है।
उनकी समानता, मानवता और न्याय पर आधारित सोच वर्तमान समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है, जब समाज विविध सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
देश-विदेश से आए शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोधपत्र
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में भारत सहित बांग्लादेश, यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों से आए विद्वानों ने नजरुल के साहित्य, सामाजिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विचारधारा पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
विशेष चर्चा इस बात पर हुई कि नजरुल के समावेशी विचारों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली और सामाजिक ढांचे में किस प्रकार प्रभावी रूप से लागू किया जा सकता है।
एक सत्र में नजरुल के संगीत और क्रांतिकारी कविता की आज की युवा पीढ़ी पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
शिक्षामंत्री का संदेश
शिक्षामंत्री ब्रात्य बसु ने अपने संबोधन में कहा कि नजरुल केवल एक कवि नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच ज्ञान के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संवाद को सशक्त बनाते हैं।
मंत्री मलय घटक ने भी कहा कि नजरुल की विचारधारा सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विश्वविद्यालय की पहल की सराहना
कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) उदय बंद्योपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अकादमिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करना है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे शोध और सांस्कृतिक विमर्श को नया आयाम मिल सके।
बौद्धिक संवाद का सशक्त मंच
इस दो दिवसीय संगोष्ठी ने यह स्पष्ट कर दिया कि नजरुल की विरासत आज भी जीवंत है और उनकी विचारधारा वैश्विक स्तर पर संवाद और शोध का महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है।
आसनसोल में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सांस्कृतिक समन्वय और वैचारिक आदान-प्रदान का भी सशक्त मंच साबित हुआ।











