आसनसोल, पश्चिम बंगाल:
देश में पहली बार ऐसा नजारा देखने को मिला जब न्याय का मंदिर एक यौन कर्मियों की बस्ती में पहुंचा। पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल स्थित लच्छीपुर यौनपल्ली में बुधवार को कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सोमेन सेन के नेतृत्व में न्यायिक अधिकारियों की एक टीम ने दौरा किया और वहां रहने वाली यौन कर्मियों की समस्याओं को न सिर्फ सुना बल्कि उन्हें कानूनी अधिकारों से भी अवगत कराया।
यौन कर्मियों ने पूरे उत्साह और सम्मान के साथ न्यायमूर्ति सेन और उनकी टीम का स्वागत किया। दुरबार महिला उन्नयन समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में यौन कर्मियों ने फूलों का गुलदस्ता भेंटकर न्यायाधीशों का अभिनंदन किया। इस दौरान दुरबार के कार्यालय में एक जागरूकता सत्र का भी आयोजन किया गया।
“हम भी श्रमिक हैं, अधिकार चाहिए” – यौन कर्मियों की भावुक मांग
दौरे के दौरान यौन कर्मियों ने खुलकर अपनी बातें न्यायाधीशों के सामने रखीं। उन्होंने कहा कि वे वर्षों से यह मांग कर रही हैं कि उन्हें भी ‘श्रमिक’ का दर्जा मिले ताकि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। न्यायमूर्ति सेन ने उनकी मांगों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि उनकी बातों को उचित मंच पर रखा जाएगा।
इस मौके पर DALSA (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) के अधिकारियों ने यौन कर्मियों को कानून से जुड़े कई पहलुओं पर जानकारी दी, जैसे – उनके कानूनी अधिकार, सरकारी योजनाएं और यौन उत्पीड़न से बचाव के उपाय।
29 मई को होगा बड़ा कार्यक्रम, रविंद्र भवन में जुटेगा पूरा प्रशासनिक अमला
DALSA ऑफिस मास्टर सौम्यजीत मुखर्जी ने जानकारी दी कि 29 मई को रविंद्र भवन, आसनसोल में एक बड़ा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सोमेन सेन मुख्य अतिथि होंगे। उनके साथ हाईकोर्ट और जिला अदालत के अन्य जज व अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम यौन कर्मियों के लिए नीतिगत बदलावों की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
दुरबार महिला उन्नयन समिति के फील्ड कोऑर्डिनेटर रवि घोष ने कहा,
“हम पहली बार देख रहे हैं कि न्यायपालिका यौन कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है। अब हमें विश्वास हो चला है कि बदलाव संभव है।”













