पांडेश्वर (आसनसोल):
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पांडेश्वर में सियासी माहौल उस समय गरमा गया, जब भाजपा प्रत्याशी जितेंद्र तिवारी चुनाव प्रचार के दौरान खोट्टाडीही इलाके में पहुंचे और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के क्वार्टर खाली करने के नोटिस को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया।
⚡ नोटिस देखते ही भड़के जितेंद्र तिवारी
खोट्टाडीही इलाके में प्रचार के दौरान जब जितेंद्र तिवारी की नजर कोलियरी क्वार्टर पर लगे घर खाली करने के नोटिस पर पड़ी, तो वह बेहद नाराज हो गए।
उन्होंने तुरंत स्थानीय कोलियरी एजेंट को फोन कर कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि यह कार्रवाई तृणमूल नेता नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती के इशारे पर की जा रही है।
📞 फोन पर ही दे डाली चुनौती
फोन पर बातचीत के दौरान जितेंद्र तिवारी ने एजेंट को खुली चुनौती देते हुए कहा,
“अगर हिम्मत है तो पहले नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती का बैंकोला स्थित घर खाली कराकर दिखाइए, क्योंकि वह भी ECL की जमीन पर बना है।”
इस बयान के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई।
✂️ नोटिस फाड़कर दिया बड़ा संदेश
घटना के दौरान जितेंद्र तिवारी ने खुद क्वार्टर पर लगे नोटिस को फाड़ दिया और जनता के बीच साफ संदेश दिया कि किसी को भी अपना घर छोड़ने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने लोगों से कहा,
“अगर कोई नोटिस लगाए तो उसे फाड़कर फेंक दें। डरने की कोई जरूरत नहीं है।”
🏠 जनता को दिया भरोसा
जितेंद्र तिवारी ने स्थानीय लोगों को आश्वासन देते हुए कहा कि अगर कोई जबरन घर खाली कराने आता है, तो वे तुरंत उन्हें फोन करें।
उन्होंने कहा,
“मैं 10 मिनट के अंदर मौके पर पहुंच जाऊंगा और किसी को भी बेघर नहीं होने दूंगा।”
🗳️ बड़ा चुनावी वादा
भाजपा प्रत्याशी ने आगे दावा किया कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस इलाके के लोगों को क्वार्टर का स्थायी लीज दिया जाएगा।
उन्होंने इसे गरीब और श्रमिक वर्ग के लिए बड़ा राहत कदम बताया।
🔥 राजनीतिक पारा चढ़ा
इस घटना के बाद पांडेश्वर विधानसभा क्षेत्र में सियासी माहौल और गरमा गया है। एक तरफ जहां भाजपा इस मुद्दे को जनता के हक की लड़ाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा जा रहा है।
🔍 विश्लेषण
विशेषज्ञों का मानना है कि कोलियरी क्वार्टर और जमीन का मुद्दा पांडेश्वर क्षेत्र में बेहद संवेदनशील है। चुनाव के समय इस मुद्दे को उठाकर भाजपा सीधे श्रमिक वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है।
अब देखना यह होगा कि यह मुद्दा चुनावी परिणामों को किस हद तक प्रभावित करता है।














