जामुड़िया: दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के बीच जामुड़िया के न्यू केंदा इलाके में गुरुवार सुबह एक बार फिर भू-धसान की घटना से हड़कंप मच गया। ईसीएल के केंदा क्षेत्र अंतर्गत न्यू केंदा कोलियरी के तीन नंबर बाउरी पाड़ा स्थित मां मनसा मंदिर के पास तड़के करीब 5 बजे अचानक जोरदार आवाज के साथ जमीन धंस गई। भू-धसान के बाद आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बीच जमीन धंसने का दायरा बढ़ने से आने वाले समय में खतरा और बढ़ सकता है।
बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह अचानक तेज आवाज सुनाई देने के बाद स्थानीय लोग घरों से बाहर निकल आए। मौके पर पहुंचने के बाद लोगों ने देखा कि मां मनसा मंदिर के पास जमीन का एक हिस्सा धंस गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले भी इसी स्थान के आसपास भू-धसान की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के बीच दोबारा जमीन धंसने की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भू-धसान वाले क्षेत्र के आसपास अभी भी कई परिवार रहते हैं। इसके अलावा धसान स्थल के पास से होकर स्थानीय लोगों के आने-जाने का रास्ता भी गुजरता है। पास में फुटबॉल मैदान होने के कारण बच्चे भी इसी रास्ते से होकर मैदान तक पहुंचते हैं। ऐसे में लोगों को आशंका है कि यदि जमीन अचानक और अधिक धंसती है तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखी गई कि धसान की सूचना के बावजूद ईसीएल का कोई अधिकारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचा। लोगों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र में पहले से भू-धसान की घटनाएं हो चुकी हैं, इसलिए किसी भी नई घटना के बाद अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए और लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
स्थानीय निवासी रामकृष्ण बाउरी ने ईसीएल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि धसान प्रभावित क्षेत्र के आसपास रहने वाले परिवार लगातार खतरे के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि ईसीएल की ओर से कुल 144 परिवारों को धसान प्रभावित क्षेत्र के आसपास रहने के कारण चिह्नित किए जाने और प्राथमिकता के आधार पर पुनर्वासित करने की बात कही गई थी। लेकिन उनके अनुसार, अब तक सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया है।
रामकृष्ण बाउरी ने मांग की कि ईसीएल प्रबंधन को सबसे पहले धसान स्थल के आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया जाता, तब तक उनके बीच भय का माहौल बना रहेगा।
वहीं, बाउरी समाज शिक्षा समिति के हरेकृष्ण बाउरी ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले पहली बार मां मनसा मंदिर के पास भू-धसान की घटना हुई थी। उनके अनुसार, इसके बाद भी इस इलाके में कई बार जमीन धंसने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर घटना के बाद ईसीएल की ओर से धसान स्थल के आसपास कंटीले तार लगाकर घेराबंदी कर दी जाती है, लेकिन प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
हरेकृष्ण बाउरी ने कहा कि कुछ परिवारों को ईस्ट केंदा क्षेत्र में ईसीएल के आवास उपलब्ध कराकर अस्थायी रूप से पुनर्वासित किया गया है, लेकिन उनके अनुसार अभी तक इन परिवारों को उचित मुआवजा और अन्य जरूरी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में ईसीएल प्रबंधन के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
स्थानीय निवासी क्रांति बाउरी ने भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर भू-धसान हुआ है, उसके पास से होकर लोगों का आवागमन होता है। पास के फुटबॉल मैदान में बच्चे प्रतिदिन खेलने के लिए जाते हैं और इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में धसान स्थल के आसपास लोगों की आवाजाही को लेकर लगातार खतरा बना हुआ है।
क्रांति बाउरी के अनुसार, धसान स्थल के मुहाने के पास से लगातार एक तरह की आवाज सुनाई देती रहती है, जिसे स्थानीय लोग जमीन के भीतर हो रही गतिविधि से जोड़कर देख रहे हैं। इस आवाज के कारण भी आसपास रहने वाले लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन को केवल घेराबंदी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने की व्यवस्था करनी चाहिए।
लगातार बारिश के दौरान भू-धसान की नई घटना ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के कारण जमीन की स्थिति और कमजोर हो सकती है, इसलिए धसान स्थल की तत्काल तकनीकी जांच जरूरी है। साथ ही लोगों की आवाजाही को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने और बच्चों को धसान क्षेत्र के पास जाने से रोकने के लिए भी ठोस व्यवस्था किए जाने की मांग की जा रही है।
फिलहाल न्यू केंदा के तीन नंबर बाउरी पाड़ा में भू-धसान के बाद स्थानीय लोगों में डर और नाराजगी दोनों दिखाई दे रही है। लोगों की मांग है कि ईसीएल प्रबंधन मौके का निरीक्षण कर धसान के कारणों और खतरे की गंभीरता का आकलन करे तथा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता दे। अब देखना यह है कि नई घटना के बाद ईसीएल प्रबंधन और प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं पुनर्वास को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।




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