Friday, 11 September 2026
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जामुड़िया में आवास योजना में कटमनी का आरोप, ग्रामीणों ने की बैठक और उठाई कार्रवाई की मांग

Moutushi · 2 July 2026, 9:06 PM

जामुड़िया | संवाददाता

जामुड़िया के चुरुलिया ग्राम पंचायत अंतर्गत देशेर मोहन गांव में बंगला आवास योजना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। विधानसभा चुनाव से पहले गांव के करीब 7 से 8 लोगों को इस योजना के तहत घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता मिलने वाली थी। लाभार्थियों के अनुसार, योजना की राशि उनके बैंक खातों में भी जमा कर दी गई थी, जिससे उनके घर बनने की उम्मीद जगी थी।

कटमनी मांगने का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे कटमनी की मांग की। आरोप है कि किसी से 10 हजार रुपये तो किसी से 5 हजार रुपये तक वसूले गए। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें यह पैसा देना पड़ा ताकि उन्हें योजना का लाभ मिल सके।

पहली किस्त के बाद बंद हो गई रकम

ग्रामीणों के मुताबिक, उन्हें पहली किस्त के रूप में लगभग 60 हजार रुपये मिले, लेकिन उसके बाद आज तक कोई अन्य राशि उनके खातों में नहीं आई। इससे उनका घर निर्माण कार्य अधूरा रह गया और वे आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

नेताओं पर आरोप—अब नहीं सुनते बात

ग्रामीणों का आरोप है कि जिन नेताओं ने उनसे पैसे लिए थे, अब उनके घर जाने पर उन्हें भगा दिया जाता है और उनकी शिकायतें नहीं सुनी जातीं। इससे गांव में नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों की बैठक, कार्रवाई की मांग तेज

इसी मुद्दे को लेकर आज गांव में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें उन सभी लोगों ने हिस्सा लिया जिन्होंने कटमनी देने का आरोप लगाया है। बैठक में ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

राजनीतिक रंग भी आया सामने

इस बैठक में स्थानीय भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता शेख मंडल भी मौजूद रहे। उनके शामिल होने से इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। उन्होंने ग्रामीणों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की।

👉 यह मामला न केवल भ्रष्टाचार के आरोपों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में किस तरह की बाधाएं सामने आती हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों को न्याय कब तक मिलता है।

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