तीसरी सालगिरह पर गूंजा मानवाधिकार का संदेश, संजय सिन्हा ने काटा केक

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नई दिल्ली: मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने वाली संस्था इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल (आई ईएचआरएससी) ने अपनी तीसरी वर्षगांठ बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ मनाई। राजधानी दिल्ली स्थित मुख्य कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्था के चेयरमैन (इंटरनेशनल बोर्ड) संजय सिन्हा ने केक काटकर जश्न की शुरुआत की।

🎉 सालगिरह पर जश्न और संदेश दोनों

कार्यक्रम के दौरान संजय सिन्हा ने संस्था के देश-विदेश में फैले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
👉 उन्होंने कहा कि संस्था के निरंतर प्रयासों के कारण मानव अधिकारों के प्रति लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।

👉 उनका मानना है कि “मानवता और समानता ही समाज की असली पहचान है।”

🌍 सिर्फ मानव अधिकार नहीं, हर जरूरतमंद की आवाज

आई ईएचआरएससी केवल मानव अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि—

  • वृद्ध और असहाय लोगों की सहायता
  • कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा
  • महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रयास

👉 इन सभी क्षेत्रों में संस्था सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

🗣️ राष्ट्रीय संयोजक ने भी रखे विचार

इस अवसर पर राष्ट्रीय संयोजक अरुण बर्मन ने संस्था की अब तक की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
👉 उन्होंने चेयरमैन संजय सिन्हा के नेतृत्व और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लगातार समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

👥 कार्यक्रम में शामिल हुए कई प्रमुख सदस्य

इस खास मौके पर संस्था के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे, जिनमें—
👉 रजनीश यादव, अरुण मिश्रा,
👉 कवि एवं युवा पत्रकार आशीष मुरादाबादी,
👉 युवराज त्रेहन, भानु यादव, कृष्ण कुमार सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

🚀 तीन साल में मजबूत पहचान

सिर्फ तीन वर्षों में ही आई ईएचआरएससी ने समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
👉 संस्था के कार्यों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है।

📊 आगे और बड़े लक्ष्य की तैयारी

सालगिरह के मौके पर यह भी स्पष्ट हुआ कि संस्था आने वाले समय में—
👉 और अधिक लोगों तक पहुंचने
👉 जागरूकता अभियान को मजबूत करने
👉 तथा समाज के हर वर्ग की मदद करने

के लिए और भी बड़े स्तर पर काम करेगी।

👉 कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम सिर्फ एक जश्न नहीं, बल्कि समाज सेवा के प्रति एक नई प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सामने आया। 🔥

prashenjit puitundi
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