नई दिल्ली: बढ़ती महंगाई, गरीबी और सामाजिक असमानता के बीच आम आदमी अपने अधिकारों से अनजान है, जिससे उसके मानव अधिकारों का हनन हो रहा है। इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल के चेयरमैन (इंटरनेशनल बोर्ड) संजय सिन्हा ने दिल्ली स्थित कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि मानव अधिकार संगठन ऐसे मामलों की जांच करता है और न्यायिक हस्तक्षेप भी कर सकता है। उनका संगठन जेलों का दौरा कर बंदियों की स्थिति का निरीक्षण करता है, संविधान और कानूनों की समीक्षा करता है, और सरकार को मानव अधिकारों की रक्षा के लिए सिफारिशें भी देता है।
न्याय की प्रक्रिया को न जानना बन रहा बड़ा कारण
संजय सिन्हा ने कहा कि भारत में लाखों लोग अपने मौलिक अधिकारों से अनजान हैं। गरीबी और आर्थिक असमानता के कारण भेदभाव चरम पर है। आम आदमी को न्याय प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने से उसके अधिकारों का हनन होता है।

उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज को भी इस दिशा में आगे आना होगा। इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल ऐसे मामलों पर काम कर रही है और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने में मदद कर रही है।










