दवा नहीं मिली तो धरना! रेलवे अस्पताल की लापरवाही उजागर

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आसनसोल, बुधवार: पूर्व ट्रेन मैनेजर एस.डी. शंभु सिंह ने इलाज के लिए ज़रूरी दवा न मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, पूर्व रेलवे, आसनसोल को पत्र सौंपा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द “डुर्वा नुमैब 1500 एमजी (इम्फिन्ज़ी ब्रांड)” इंजेक्शन की डोज़ नहीं मिली, तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे।

💊 कैंसर का इलाज अधर में, बढ़ रही तकलीफ

शंभु सिंह लंग कैंसर से पीड़ित हैं और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, बायकुला (मुंबई) में उनका इलाज चल रहा है। उन्हें इस बीमारी के इलाज के लिए कई चरणों में इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन की ज़रूरत है।

  • पहली खुराक 13 मार्च को दी गई थी
  • दूसरी खुराक 2 अप्रैल को दी जानी थी
  • लेकिन अब तक कोई इंजेक्शन नहीं मिला

उन्होंने कहा कि उन्होंने दवा की आपूर्ति के लिए पहले ही संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंप दिया था, पर किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।

⚠️ स्थिति गंभीर, स्वास्थ्य गिर रहा है

पत्र में लिखा गया है कि

“दवा समय पर नहीं मिलने के कारण मेरी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। यह सिर्फ मेरी जान का सवाल नहीं है, यह पूरे रेलवे चिकित्सा तंत्र की संवेदनहीनता को दर्शाता है।”

📢 “धरना ही आखिरी विकल्प होगा”

शंभु सिंह ने साफ कहा है कि अगर दवा जल्द उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे

“रेलवे प्रशासन के खिलाफ **धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।”
“यह इंसाफ की लड़ाई है। मैं रेलवे का वफादार कर्मचारी रहा हूँ, अब इलाज के लिए तरसना पड़ रहा है।”

📄 पत्र की प्रतिलिपि भेजी गई इन अधिकारियों को:

  • डीआरएम, आसनसोल
  • सीएमडी, बी.आर. सिंह हॉस्पिटल, सियालदह

📌 निष्कर्ष:
शंभु सिंह का यह मामला ना केवल एक मरीज की वेदनशील स्वास्थ्य स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे रेलवे मेडिकल सिस्टम में अनदेखी और विलंब मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़ा जन आंदोलन बन सकता है।

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