नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा दावा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान खुद मौके पर पहुंचकर दखल देती हैं, जो एक खतरनाक और चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जो पिछले सप्ताह कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक सलाहकार कंपनी I-PAC पर हुई छापेमारी से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ—न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली—इस मामले की सुनवाई कर रही थी।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में ED का गंभीर आरोप
ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जब भी किसी वैधानिक केंद्रीय एजेंसी ने कानून के तहत कार्रवाई की, मुख्यमंत्री स्वयं जांच स्थल पर पहुंचीं और हस्तक्षेप किया।
मेहता ने कहा—
“यह रवैया न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि इससे गलत उदाहरण बनेगा और केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल गिरेगा।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो राज्यों को यह संदेश जाएगा कि वे जांच में दखल दे सकते हैं और बाद में राजनीतिक दबाव बनाकर धरने पर बैठ सकते हैं।
🚨 अफरातफरी पर सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पिछले शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में हुई अव्यवस्था और अफरातफरी पर भी नाराज़गी जताई। अदालत ने संकेत दिया कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान इस तरह की अराजकता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
🏠 I-PAC और प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी
यह पूरा मामला 8 जनवरी से जुड़ा है, जब ईडी ने कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में साल्टलेक स्थित I-PAC के कार्यालय और कोलकाता में इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी।
ईडी का आरोप है कि छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों को रोकने की कोशिश की गई, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं तथा जांच से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज अपने साथ ले गईं।
🗣️ ममता और TMC का पलटवार
वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि केंद्रीय एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की।
तृणमूल कांग्रेस ने भी ईडी के सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए नकार दिया है।
इस बीच, मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब राज्य पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली, जिससे केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और गहरा गया है।
🔥 क्यों अहम है यह मामला?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला केवल I-PAC छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्र बनाम राज्य और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता से जुड़ा एक बड़ा संवैधानिक सवाल खड़ा करता है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का रुख इस विवाद की दिशा तय कर सकता है।











