सांक्टोरिया/आसनसोल: ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के क्वार्टरों पर अनधिकृत कब्जे के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। 01 अप्रैल 2026 को दिए गए इस फैसले ने साफ कर दिया है कि अब रिटायरमेंट के बाद कंपनी के आवास पर कब्जा बनाए रखना कर्मचारियों के लिए भारी पड़ सकता है।
⚖️ कोर्ट का स्पष्ट संदेश—कब्जा किया तो भुगतना होगा
हाईकोर्ट ने डब्ल्यूपीए 6050 और डब्ल्यूपीए 6053 (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य) मामलों में फैसला सुनाते हुए ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के पक्ष को सही ठहराया।
अदालत ने कहा कि—
👉 कंपनी क्वार्टर पर अनधिकृत कब्जे से जुड़ी देनदारियां सरकारी बकाया मानी जाएंगी
👉 इनकी वसूली सीधे रिटायरमेंट लाभ (ग्रेच्युटी) से की जा सकती है
💰 ग्रेच्युटी से होगी वसूली, जुर्माना भी शामिल
फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि—
- बकाया किराया
- दंडात्मक (पेनल) किराया
दोनों को सरकारी बकाया की श्रेणी में रखा जाएगा और इन्हें ग्रेच्युटी से समायोजित किया जा सकता है।
🏠 क्वार्टर खाली नहीं किया तो रुकेगा पैसा
एक मामले में, पोनीआटी वर्कशॉप और सतग्राम-श्रीपुर क्षेत्र के एक कर्मचारी ने रिटायरमेंट के बाद भी क्वार्टर खाली नहीं किया।
इस पर ईसीएल ने उसकी ग्रेच्युटी रोक दी, जिसे अदालत ने पूरी तरह वैध और उचित ठहराया।
📊 लाखों रुपये ईसीएल को लौटाने का आदेश
अदालत ने निर्देश दिया कि—
- एक मामले में ₹18,99,752
- दूसरे में ₹20,00,000
जो राशि सहायक श्रमायुक्त, आसनसोल के पास जमा थी, उसे ईसीएल को वापस किया जाए।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि—
👉 जब तक कर्मचारी क्वार्टर खाली नहीं करते, तब तक किराया और जुर्माना ग्रेच्युटी से कटता रहेगा
👉 क्वार्टर खाली करने के बाद बची राशि 15 दिनों के भीतर लौटा दी जाए
⚠️ संस्थागत व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अनधिकृत कब्जा—
- संस्थागत व्यवस्था को कमजोर करता है
- वर्तमान कर्मचारियों के लिए आवास की उपलब्धता में बाधा डालता है
🔍 कर्मचारियों के अधिकारों की बड़ी जीत
यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है जो कंपनी क्वार्टर के इंतजार में रहते हैं।
अब यह साफ हो गया है कि—
👉 हर क्वार्टर पर कार्यरत कर्मचारियों का पहला अधिकार है
👉 रिटायरमेंट के बाद कब्जा बनाए रखना अब आसान नहीं होगा
📢 कुल मिलाकर, कलकत्ता उच्च न्यायालय के इस फैसले ने ईसीएल समेत सभी सार्वजनिक उपक्रमों को एक मजबूत संदेश दिया है—संसाधनों का दुरुपयोग अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।













