दुर्गापुर में दीवारों पर गोबर! चुनाव से पहले सियासी संग्राम तेज

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पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक माहौल उतना ही गरम होता जा रहा है। इसी बीच एक चौंकाने वाली घटना ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है।

तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार
प्रदीप मजूमदार
के समर्थन में लिखी गई दीवारों पर रात के अंधेरे में गोबर पोतने का आरोप सामने आया है।

🧱 सुबह खुला विवाद का राज

कांकसा के जाटगढ़िया इलाके में शनिवार सुबह स्थानीय लोगों ने देखा कि कई दीवारों पर की गई लिखाई को गोबर से ढक दिया गया है।
👉 देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई
👉 लोगों में आक्रोश और तनाव बढ़ गया

⚡ तृणमूल का आरोप, बीजेपी पर निशाना

घटना के बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं ने
भारतीय जनता पार्टी
पर सीधा आरोप लगाया।

उनका कहना है—
👉 इलाके में लगाए गए पार्टी झंडे भी हटाए गए
👉 कई दीवार लिखाई को जानबूझकर खराब किया गया
👉 भाजपा समर्थित असामाजिक तत्वों ने यह काम किया

तृणमूल का दावा है कि हार के डर से भाजपा माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है।

🚓 पुलिस पहुंची मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही कांकसा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची।
👉 इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई
👉 स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश जारी है

🔄 बीजेपी का पलटवार

इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए दुर्गापुर पूर्व से भाजपा उम्मीदवार
चंद्रशेखर बंद्योपाध्याय
ने कहा—
👉 “भाजपा इस तरह की राजनीति में विश्वास नहीं करती”

उन्होंने पलटकर आरोप लगाया—
👉 तृणमूल समर्थकों ने ही उनके पार्टी झंडे फाड़े
👉 इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की गई है

🔥 गुटबाजी का एंगल

चंद्रशेखर बंद्योपाध्याय ने यह भी दावा किया कि—
👉 यह घटना तृणमूल के अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा है
👉 “कोई दीवार पर गोबर लगा रहा है, तो कोई फ्लेक्स फाड़ रहा है”

उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की।

📊 क्या कहता है राजनीतिक माहौल?

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • चुनाव के समय इस तरह की घटनाएं आम हो जाती हैं
  • प्रचार सामग्री को लेकर टकराव बढ़ता है
  • इसका असर वोटरों के मनोभाव पर पड़ सकता है

🧨 निष्कर्ष: दुर्गापुर पूर्व में बढ़ती टकराव की राजनीति

दुर्गापुर पूर्व में दीवार लिखाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव में बदल चुका है।

👉 आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है
👉 पुलिस और प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है

अब देखना होगा कि—
क्या यह विवाद चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा या जनता मुद्दों के आधार पर फैसला करेगी?

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