कोलकाता |
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है—इस बार वजह हैं बीजेपी के फायरब्रांड नेता दिलीप घोष, जो हाल के दो बड़े कार्यक्रमों से गायब रहे। एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे और दूसरे में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं—क्या दिलीप घोष अब हाशिए पर हैं? या क्या वे ममता बनर्जी की ओर देख रहे हैं?
🔥 एक हफ्ते में दो बार ‘ना’—मोदी और शाह दोनों कार्यक्रमों से गायब
29 मई को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल दौरे पर आए, दिलीप घोष कार्यक्रम से नदारद थे।
1 जून को जब अमित शाह ने बीजेपी के कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लिया, तब भी दिलीप घोष मौजूद नहीं थे।
🗣️ “कोई बुलावा नहीं आया”—दिलीप घोष का सीधा बयान
शनिवार को दिलीप घोष ने मीडिया से कहा:
“मुझे अमित शाह जी के कार्यक्रम के लिए बुलाया ही नहीं गया।
मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जब मैं अध्यक्ष था, तब हर कार्यक्रम में जाता था।
अब मैं मैदान में जाकर कार्यकर्ताओं के साथ काम करना चाहता हूं।”
📸 ममता बनर्जी संग दिलीप घोष की तस्वीर ने उड़ाए कयास
कुछ दिन पहले दिलीप घोष मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखाई दिए।
उनके साथ की तस्वीरें वायरल होते ही अटकलें शुरू हो गईं—क्या दिलीप घोष तृणमूल कांग्रेस की ओर झुक रहे हैं?
घोष ने सफाई दी:
“मैं तो तीर्थ पर गया था। यह मेरा अधिकार है।
कोई मेरी बीजेपी से निष्ठा पर सवाल नहीं उठा सकता।”
⚔️ बीजेपी में गुटबाजी? शुभेंदु बनाम दिलीप की खींचतान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिलीप घोष का कार्यक्रमों से गायब रहना एक बड़ा संकेत है।
बीजेपी में शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष गुट के बीच पहले से खींचतान चली आ रही है।
अब यह और गहराती दिख रही है।
कई कार्यकर्ता भी मानते हैं कि “दिलीप दा” को नजरअंदाज किया जा रहा है।
🎯 क्या यह बीजेपी में पावर शिफ्ट का संकेत है?
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि:
“बीजेपी के अंदर नेतृत्व की लड़ाई चल रही है।
दिलीप घोष जैसे नेता अगर हाशिए पर जाते हैं, तो कार्यकर्ताओं में भी असंतोष बढ़ सकता है।
इससे पार्टी को आगामी चुनावों में नुकसान हो सकता है।”













