आसनसोल/डामरा (पश्चिम बंगाल):
संस्कृति, श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है डामरा क्षेत्र के घुषिक गांव में, जहाँ धर्मराज पूजा का शुभारंभ पूरे उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ हुआ। यह पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गाँव की सदियों पुरानी विरासत है, जो आज भी गांववासियों के दिलों में ज़िंदा है।
पूरे गांव को भक्ति रस में सराबोर कर देने वाले इस महायज्ञ में 108 ब्राह्मण वेद-मंत्रों और वैदिक विधियों के साथ अनुष्ठान कर रहे हैं। धर्मराज मंदिर परिसर में बलि प्रथा, मंत्रोच्चार, यज्ञ, धार्मिक गीत, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजन को और भी दिव्य बना रही हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, धर्मराज की पूजा करने से गाँव में न्याय, शांति और समृद्धि बनी रहती है। यह पूजा समाज को एकजुट करती है और गाँव में सांस्कृतिक एकता का पर्व बन चुकी है।
घुषिक गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह पूजा कई पीढ़ियों से अनवरत चली आ रही है। युवा पीढ़ी भी इस परंपरा को पूरे मनोयोग से निभा रही है, जो एक सुखद संकेत है कि हमारी लोकसंस्कृति अभी भी जीवंत है।













