कारखानों की चुप्पी के खिलाफ सीटू का हल्लाबोल! आसनसोल में गरजी मज़दूरों की आवाज़

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पश्चिम बर्दवान : श्रमिक संगठन सीटू (CITU) ने बंद पड़े कारखानों को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर मंगलवार को ज़िला शासक कार्यालय का घेराव किया। इससे पहले, हज़ारों श्रमिकों की विशाल रैली ने आसनसोल की सड़कों को लाल झंडों से भर दिया।

🔊 रैली में उठीं गूंजती आवाज़ें: “बंद फैक्टरी नहीं मंज़ूर!”

सीटू कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की। रैली का समापन ज़िला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के साथ हुआ, जिसमें कारखानों को पुनः खोलने, स्थानीय युवाओं को रोज़गार देने और खनन उद्योग में निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई।

🏭 बंद पड़ी फैक्ट्रियाँ: विकास या विनाश?

पूर्व सांसद वंगशगोपाल चौधरी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा—

“आसनसोल और आस-पास के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एचसीएल, बैनस्टैंडर्ड, बालको जैसी बड़ी फैक्ट्रियाँ सालों से बंद पड़ी हैं। सरकार अब इनकी ज़मीनें बेचने की तैयारी में है। यह जनता के साथ अन्याय है।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि—

“सरकार को चेतावनी दी जाती है कि अगर बंद फैक्ट्रियों को चालू नहीं किया गया तो मज़दूर सड़कों पर उतरेंगे।”

🪓 निजीकरण की आंधी: खदानें भी खतरे में!

चौधरी ने बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड की कई खदानें अब निजी कंपनियों को बेची जा रही हैं। इससे हज़ारों श्रमिकों का भविष्य अधर में लटक गया है।

📅 अगली रणनीति: 20 तारीख को ब्रिगेड रैली

सीटू ने ऐलान किया है कि 20 अप्रैल को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक विशाल रैली होगी, जहां पूरे बंगाल से श्रमिक जुटेंगे। यह रैली सरकार को आखिरी चेतावनी देने का काम करेगी।

✊ ज़िला प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन: मुख्य माँगें

🔹 मांगविवरण
बंद फैक्ट्रियों को चालू करोएचसीएल, बालको, बैनस्टैंडर्ड को जल्द शुरू किया जाए
खदानों का निजीकरण रोकोकोयला उद्योग को सार्वजनिक क्षेत्र में रखा जाए
स्थानीय रोज़गार सुनिश्चित करोक्षेत्रीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए
ज़मीन बिक्री पर रोक लगेऔद्योगिक ज़मीनों को बचाया जाए
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