आसनसोल:
“बचपन किताबों में हो, बोझ ढोने में नहीं” — इसी विचार के साथ रविवार को आसनसोल में विश्व शिशु श्रम विरोधी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन शिशु कल्याण विभाग की ओर से किया गया जिसमें राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक, पश्चिम बर्दवान के जिला शासक एस. पोन्ना बलम, आसनसोल नगर निगम के डिप्टी मेयर अभिजीत घटक समेत कई प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
🔍 मुख्य बिंदु:
- शिशु श्रम उन्मूलन पर फोकस, शिक्षा की अनिवार्यता पर जोर
- बच्चों के अधिकारों की रक्षा को लेकर प्रशासन का कड़ा रुख
- सरकारी योजनाओं की जानकारी व जन-जागरूकता अभियान की रूपरेखा
- बाल अधिकारों पर आधारित संकल्प और भावी योजनाओं की घोषणा
🧠 वक्ताओं ने क्या कहा?
मंत्री मलय घटक ने कहा:
“बचपन कलम से सजे, फावड़ा थामने को मजबूर न हो — यही हमारी प्राथमिकता है।“
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ‘स्कूल चलो अभियान’, ‘किशोरी शक्ति योजना’ और ‘कन्याश्री’ जैसी योजनाओं के माध्यम से बाल श्रम रोकने के लिए सक्रिय है।
एस. पोन्ना बलम ने कहा:
“शिशु श्रम को खत्म करना प्रशासन की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।“
📢 कार्यक्रम में लिए गए संकल्प:
- किसी भी प्रकार के शिशु श्रम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
- हर बच्चे को शिक्षा का पूर्ण अधिकार दिलाया जाएगा
- बाल श्रमिकों की पहचान कर उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी
- शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जाएगा
👩👩👦👦 जन सहभागिता और भविष्य की योजना:
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूलों के बच्चे, शिक्षकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी रही।
सरकार ने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में ‘नो चाइल्ड लेबर’ अभियान को ब्लॉक स्तर तक ले जाया जाएगा।










