जामुड़िया के चिचुड़िया गांव में जय मां दलदली काली पूजा के पावन अवसर पर छह दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव और भव्य मेले का आयोजन पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है। लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक पूजा को इस वर्ष विशेष रूप से आकर्षक रूप दिया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया है।
आस्था और संस्कृति के इस संगम में प्रतिदिन शाम होते ही श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दराज के गांवों से भी लोग परिवार सहित मेले में पहुंच रहे हैं।
मेले में आकर्षण का केंद्र बने झूले और दुकानें
मेला परिसर में बड़े-बड़े झूले, स्वादिष्ट व्यंजनों की दुकानें, बच्चों के खिलौने, हस्तशिल्प और सजावटी वस्तुओं के स्टॉल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्ग के लोग मेले का आनंद ले रहे हैं।
रंग-बिरंगी रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गूंज से चिचुड़िया इन दिनों एक उत्सव नगरी में तब्दील हो गया है।
विशेष पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला
चिचुड़िया दलदली मां काली मेला कमेटी के सदस्य अमित चक्रवर्ती ने बताया कि रविवार शाम को मेले का विधिवत उद्घाटन किया गया। सोमवार को मां दलदली काली की विशेष पूजा-अर्चना के साथ श्यामा संगीत और भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मंगलवार को विशेष संगीत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें टीवी रियलिटी शो Sa Re Ga Ma Pa से प्रसिद्ध गायक Deep Chatterjee मुख्य आकर्षण होंगे।
बुधवार को लोकगीत संध्या, गुरुवार को पारंपरिक कविगान और शुक्रवार को प्रसिद्ध यात्रा नाट्य “आजकेर अभिमन्यु” (आज का अभिमन्यु) का मंचन किया जाएगा। इसी दिन छह दिवसीय महोत्सव का समापन होगा।
150 वर्ष पुरानी परंपरा, पहली बार भव्य मेला
मेला समिति के अनुसार मां दलदली काली की पूजा की परंपरा करीब 150 वर्ष पुरानी है। पहले यहां केवल पूजा और प्रसाद वितरण तक ही आयोजन सीमित रहता था, लेकिन इस वर्ष पहली बार पूजा के साथ विशाल मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला जोड़ी गई है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस आयोजन से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और भी मजबूत होगी।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
आयोजन समिति की ओर से मेले में सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात नियंत्रण के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। स्वयंसेवकों की टीम भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सहायता के लिए तैनात है।
चिचुड़िया और आसपास के क्षेत्रों में इस महोत्सव को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मां दलदली काली के दर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
यह छह दिवसीय महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक एकता और सामुदायिक सौहार्द का भी अद्भुत उदाहरण बनकर उभर रहा है।











